बलरामपुर जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के अंतर्गत बेसलाइन सर्वे के संबंध में आज जिला पंचायत सभाकक्ष में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष एवं कलेक्टर राजेंद्र कटारा उपस्थित रहे। कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने बताया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए बेसलाइन सर्वे अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस सर्वे के आधार पर आगामी पांच वर्षों के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। कलेक्टर ने जानकारी दी कि जिले की 82 प्रत्यक्ष और 138 अप्रत्यक्ष, कुल 220 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए यह कार्ययोजना बनाई जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और कन्वर्जेंस के माध्यम से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हितग्राहीवार जानकारी संकलित कर उसे कार्ययोजना में शामिल करने पर जोर दिया, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर ने बताया कि सर्वेक्षण कार्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। ग्राम पंचायतों में बेसलाइन सर्वे के साथ पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना और वार्षिक योजना भी तैयार की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों के कार्यों को समाहित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित ग्रामों में 9 मार्च तक सभी सर्वेक्षण दलों का गठन कर लिया जाएगा, जिससे निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ हो सके। अपर कलेक्टर आर.एन. पाण्डेय ने जानकारी दी कि बेसलाइन सर्वे के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय समितियों का गठन किया गया है। कार्यशाला में जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर द्वारा पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी गई। मास्टर ट्रेनर ने बताया कि सर्वे के तहत क्षेत्र की पहचान कर डेटा संग्रहण किया जाएगा और उसके आधार पर गेप विश्लेषण कर पंचवर्षीय एवं वार्षिक योजनाएं बनाई जाएंगी। डीएमएफ नियमों के अनुसार, न्यास निधि का न्यूनतम 70 प्रतिशत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और आजीविका सृजन में खर्च किया जाएगा। शेष 30 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे अधोसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा और वाटरशेड विकास में उपयोग की जाएगी।


