डीएवी ग्रुप के आदेश से शिक्षकों की बढ़ी परेशानी:बंद के दौरान स्कूल आने का दबाव, महिला शिक्षकों ने सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

राजधानी रांची के डीएवी स्कूलों के मैनेजमेंट के आदेश ने वहां काम कर रहे शिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है। यह आदेश बंद के दौरान स्कूल आने से जुड़ा है। दरअसल रांची शहर के डीएवी ग्रुप के स्कूलों के प्रबंधन ने बंद के दौरान स्कूल पहुंचने को कहा। ऐसा 22 मार्च की बंद के दौरान भी किया गया। वहीं आज भी शिक्षकों को स्कूल बुलाया गया। स्कूल मैनेजमेंट के इस आदेश से परेशान शिक्षकों ने दैनिक भास्कर को मेल कर अपनी परेशानी बताई। शिक्षकों ने बताया कि अक्सर बंद के दौरान इस तरह की परेशानी उठानी पड़ती है। सबसे ज्यादा महिला शिक्षकों को होती है। डीएवी कपिलदेव, डीएवी बरियातू, एसआर डीएवी पुंदाग सहित डीएवी के दूसरे स्कूल में महिला शिक्षकों की काफी संख्या है। इन्हें बंद या किसी दूसरे प्रदर्शन के दौरान स्कूल आने में दिक्कत होती है। शिक्षकों ने बताई अपनी परेशानी मेल से मिली शिकायत के बाद डीएवी ग्रुप के अलग-अलग स्कूलों के कई शिक्षकों से दैनिक भास्कर ने बात की। शिक्षकों ने बताया कि अक्सर बंद या दूसरे कारणों से जब स्कूल में बच्चों की छुट्‌टी रहती है तब स्कूल प्रबंधन काम पर आने को कहता है। शिक्षकों ने बताया कि बीते 22 मार्च को हुए बंद के दौरान, जब छात्रों की छुट्‌टी थी, तब शिक्षकों को काम पर आने के लिए कहा गया। इस दौरान, स्कूल बसों के रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोक लिया, जिसके कारण शिक्षकों को पैदल चल कर स्कूल आना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान उन्हें सुरक्षा को लेकर भी डर लगता रहा। शिक्षकों ने बताया कि आज भी हमें बुलाया गया है। शिक्षकों ने कहा कि कई बार बस की सुविधा तो मिल जाती है पर आज बस नहीं दिया गया। कई फिमेल टीचर्स ने बताया कि हम में से कई अपने स्तर पर स्कूल आना-जाना करती हैं। बंद के दौरान सुरक्षा के लिहाज से भी सोचना पड़ता है। घरवालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। छुट्टियां नहीं तो कटेगा वेतन सबसे ज्यादा परेशानी उन शिक्षकों को होती है, जिनके पास छुट्टियां नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रबंधन हमसे कहता है कि बंद या प्रदर्शन के दौरान अगर आपको नहीं आना है तो आप छुट्टियां ले लीजिए। अब परेशानी उन शिक्षकों के साथ ज्यादा हो जाती हैं जिनके पास छुट्टियां नहीं बची हैं। दिक्कत तब होती है जब वे इस दौरान स्कूल नहीं आते हैं। मैनेजमेंट ऐसे शिक्षकों के वेतन काट लेती है। मैनेजमेंट कुछ बोलने को तैयार नहीं शिक्षकों से मेल के माध्यम से मिली शिकायत के बाद स्कूलों के प्राचार्य और मैनेजमेंट के लोगों से बात करने की कोशिश की गई। लेकिन किसी ने भी आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। मैनेजमेंट की ओर से इतना बताया गया कि हमें हमारे ऊपर से जो आदेश मिलता है, उसे ही शिक्षकों को बताया जाता है। आधिकारिक रूप से स्कूलों के मैनेजमेंट का पक्ष आने के बाद अपडेट किया जाएगा।

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