डीग में गुरुवार को सवर्ण समाज का आक्रोश फूट पड़ा। यूजीसी के नये नियमों का विरोध करते हुए सवर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। इसको लेकर मेला ग्राउंड स्थित एक निजी मैरिज होम में बैठक हुई, जिसमें यूजीसी के नए प्रावधानों से सवर्ण समाज को होने वाले कथित नुकसान पर चर्चा हुई। बैठक के बाद “यूजीसी कानून वापस लो” के नारों के साथ एक बाइक रैली निकाली गई, जो समता आंदोलन के जिलाध्यक्ष राहुल लवानियां के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंची। कलेक्टर की अनुपस्थिति में एडीएम को सवर्ण समाज की ओर से एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन अग्रवाल समाज से चंदन बंसल, खंडेलवाल समाज से पवन खंडेलवाल, जैन समाज से वीरेंद्र जैन, पंजाबी खत्री समाज से रमेश अरोड़ा और समता आंदोलन समिति के जिलाध्यक्ष राहुल लवानियाँ द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग शामिल हुए। ‘कॉलेज, यूनिवर्सिटीज में जातीय विभाजन बढ़ सकता है’
राहुल लवानियां ने बताया कि प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में यूजीसी के ‘प्रमोशंस ऑफ इक्वेलिटी रेगुलेशंस-2026’ को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन बताया गया है। ज्ञापन में यह आशंका व्यक्त की गई है कि इन प्रावधानों से उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षित और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों व शिक्षकों के बीच जातीय विभाजन बढ़ सकता है। नियमों के दुरुपयोग की आशंका
नए नियमों के तहत संस्थानों में गठित होने वाले समान अवसर केंद्र (ईओसी) और इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं होने से निष्पक्ष न्याय प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, झूठी शिकायतों पर दंड प्रावधान हटाए जाने से नियमों के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से यूजीसी-2026 के प्रावधानों को वापस लेकर पूर्ववत करने की मांग की है, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में शांतिपूर्ण और संतुलित शैक्षणिक वातावरण बना रहे। ज्ञापन की प्रतिलिपियां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी भेजी गई हैं।


