भास्कर न्यूज |लुधियाना चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स ने केंद्र सरकार द्वारा डीटीईपी योजना में की गई कटौती पर गहरी चिंता जताई है। उद्योग संगठन का कहना है कि इस फैसले से खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़ा नुकसान होगा। केंद्रीय बजट 2026–27 में आरओ डीटीईपी योजना का बजट 18,232.50 करोड़ रुपये से घटाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही, 23 फरवरी 2026 को जारी डीजीएफटी की अधिसूचना के अनुसार, आरओ डीटीईपी की दरें भी पहले की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम कर दी गई हैं। सीआईसीयू के अनुसार, बजट में कटौती और दरें घटाने से निर्यातकों को मिलने वाला फायदा लगभग 65 से 75 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ेगा, जहां अधिकतर यूनिटें एमएसएमई हैं और बहुत कम मुनाफे पर काम करती हैं। उद्योग पहले से ही महंगी बिजली, ज्यादा ट्रांसपोर्ट खर्च, ऊंची ब्याज दरों और बांग्लादेश, वियतनाम व चीन जैसे देशों से कड़ी टक्कर झेल रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कई विदेशी खरीदारों ने कीमतें कम करने की मांग शुरू कर दी है और कुछ ऑर्डर दूसरे देशों को जा सकते हैं। आरओ डीटीईपी योजना का मकसद उन टैक्सों की भरपाई करना है जो जीएसटी के तहत वापस नहीं मिलते। अगर यह लाभ कम हुआ तो इसका मतलब होगा कि भारत अपने उत्पादों के साथ टैक्स भी निर्यात करेगा, जिससे हमारी प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी। सीआईसीयू ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वाणिज्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय और डीजीएफटी को ज्ञापन भेजकर पुरानी दरें बहाल करने और पर्याप्त बजट देने की मांग की है। संगठन ने कहा कि निर्यात नीति स्थिर और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि ‘मेक इन इंडिया’ और देश के निर्यात लक्ष्य मजबूत रह सकें।


