डीडवाना में पाक रमजान उल मुबारक के दूसरे जुमे की नमाज शुक्रवार को अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। शहर की विभिन्न मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां सामूहिक रूप से जुमे की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद मुल्क में अमन-चैन, शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआएं मांगी गईं। रमजान के दूसरे जुमे को लेकर मुस्लिम समाज में विशेष उत्साह देखा गया। लोग नए परिधान पहनकर दोपहर से पहले ही मस्जिदों में पहुंचने लगे। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर जुमे की मुबारकबाद दी। इस अवसर पर काजी-ए-शहर रेहान उस्मानी साहब ने खिताब किया। उन्होंने बताया कि रमजान का पहला अशरा रहमतों का होता है, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों पर खास रहमतें नाजिल करता है। उन्होंने रमजान को तमाम महीनों में अफजल बताते हुए इसका पूरा एहतराम करने और ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की अपील की। काजी उस्मानी ने सदका-ए-फितर की अहमियत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर साहिब-ए-हैसियत मुसलमान पर प्रति व्यक्ति लगभग 2 किलो 45 ग्राम अनाज या उसकी कीमत अदा करना वाजिब है। स्थानीय मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति लगभग 75 रुपए फितरा अदा किया जा सकता है। उन्होंने रोजे की फजीलत पर जोर देते हुए कहा कि बिना किसी वाजिब वजह के रोजा छोड़ना गुनाह है और हर बालिग मुसलमान पर रोजा फर्ज है। जकात के संबंध में काजी साहब ने बताया कि जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या बावन तोला चांदी हो, वह मालिक-ए-निसाब है। ऐसे व्यक्ति को अपने माल का चालीसवां हिस्सा यानी ढाई प्रतिशत जकात अदा करना फर्ज है। उन्होंने सदका-ए-फितर और जकात की अदायगी में जल्दी करने को सुन्नत बताया, ताकि जरूरतमंदों तक समय रहते सहायता पहुंच सके। खिताब के बाद क्षेत्र की तरक्की, देश की सलामती और आपसी भाईचारे के लिए सामूहिक दुआ की गई। रमजान के इस मुबारक महीने में इबादत और खैरात के जरिए समाज में सौहार्द, करुणा और एकता का संदेश दिया गया।


