डीडवाना में होली का पर्व माली समाज की 400 साल पुरानी ‘गैर’ परंपरा के साथ मनाया जाता है। धूलण्डी के दिन निकलने वाली यह अनूठी गैर अपनी सांस्कृतिक गरिमा और जीवंत प्रदर्शन के लिए देशभर में जानी जाती है। इस पारंपरिक गैर में माली समाज के 12 बासों से सैकड़ों युवा भाग लेते हैं। वे उत्कृष्ट स्वांग कला का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न पौराणिक, ऐतिहासिक और सामाजिक पात्रों का रूप धारण करते हैं।
गैर में भगवान राम, लक्ष्मण, लंकापति रावण, भगवाधारी साधु-संत, फकीर-मलंग और लोक कलाकारों सहित कई वेशभूषाएं देखने को मिलती हैं। यह भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और रचनात्मकता का एक जीवंत संगम है। कलाकार महीनों पहले से अपनी वेशभूषाएं और स्वांग तैयार करते हैं।
गैर शहरभर में भ्रमण करती है, जहां नागरिकों द्वारा जगह-जगह इसका भव्य स्वागत किया जाता है। यह उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति और सामाजिक संदेशों का प्रतीक है, जो इसे राजस्थान की अन्य गैर परंपराओं से अलग बनाता है।
गैर का अंतिम पड़ाव आडकाबास में होता है। यहां नगर परिषद द्वारा सर्वश्रेष्ठ तीन गैरों को पुरस्कृत किया जाता है, जिससे युवाओं में उत्साह बढ़ता है और इस सदियों पुरानी धरोहर को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। यदि इस अनूठी परंपरा को सरकारी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार मिले, तो माली समाज की यह गैर डीडवाना के लिए एक बड़ा पर्यटन आकर्षण बन सकती है और इसे सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है।


