डूंगरपुर की मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में जिले की मिट्टी में नाइट्रोजन 51.27 प्रतिशत कम हो गया है। इस गिरावट से कृषि विभाग के ‘मिशन ऑर्गेनिक’ को झटका लगा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग और फसल चक्र की अनदेखी को इस कमी का मुख्य कारण माना जा रहा है। डूंगरपुर जिले में रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग से कृषि विभाग का ‘मिशन ऑर्गेनिक’ प्रभावित होता दिख रहा है। कृषि विभाग के सर्वेक्षण आंकड़ों के अनुसार, मिट्टी के नमूनों में नाइट्रोजन की कमी लगातार देखी गई है। वर्ष 2022 में 22,488 नमूनों में से 8,471 में नाइट्रोजन कम पाया गया। वर्ष 2023 में 9,357 में से 3,455 नमूनों में, वर्ष 2024 में 13,988 में से 6,134 नमूनों में और वर्ष 2025 में 9,490 में से 4,862 नमूनों में नाइट्रोजन की मात्रा कम दर्ज की गई।
कृषि अनुसंधान अधिकारी (रसायन) बलवंत लबाना ने बताया कि खेती में खरपतवारनाशी, कीटनाशी और फफूंदनाशी रसायनों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, इन रसायनों के कारण खेतों से केंचुए और मिट्टी में मौजूद लाभकारी फंगस पेसिलोमाइसेस लिलासिनस जैसे सूक्ष्मजीव नष्ट हो रहे हैं। यह फंगस प्राकृतिक रूप से दीमक और नेमाटोड को नियंत्रित करता था। रसायनों पर बढ़ती निर्भरता से किसानों की खेती की लागत में वृद्धि हुई है, जबकि उनकी आय में कमी आई है।


