महाकुंभ दिव्य-भव्य, डिजिटल तो है ही साथ में संगम की रेती पर अद्भुत और अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। अध्यात्म की नगरी महाकुंभ में अखाड़ों और नागा संन्यासियों के शिविर में पशु प्रेम की झलक भी नजर आ रही है। ऐसी ही एक अनूठी तस्वीर डॉगी सोमा की है। वह गुरुग्राम के खेटाबास आश्रम से महाकुंभ आए जूना अखाड़े के श्री महंत तारा गिरी उर्फ पहाड़ी बाबा के शिविर में है। 9 माह की डॉगी सोमा के अलग ही रंग हैं। माता पूर्णा गिरि के साथ ही सोमा भी रहती है। सोमा के बालों की जटाएं बंधी हैं। वह तिलक लगाती है। उसका अपना सिंहासन है, जहां से वह शीश नवाती है। सोमवार के दिन सोमा का जन्म हुआ था, इसलिए उसका नाम सोमा रखा गया।


