रणथंभौर की प्रसिद्ध संस्था टाइगर वॉच ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. कमलेश शर्मा को पीपल एंड नेचर सर्विसेज टू वाइल्डलाइफ अवार्ड के लिए चुना है। डॉ. शर्मा वर्तमान में पुलिस मुख्यालय में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। टाइगर वॉच के जीव विज्ञानी डॉ. धर्मेंद्र खांडल ने बताया- बांसवाड़ा के बड़ोदिया कस्बे के मूल निवासी डॉ. शर्मा को यह सम्मान 1 मार्च को सवाईमाधोपुर के फतेह पब्लिक स्कूल में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। डॉ. शर्मा पिछले 25 वर्षों से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। यह पुरस्कार टाइगर वॉच के संस्थापक स्वर्गीय फतेहसिंह राठौड़ की स्मृति में दिया जाता है। राठौड़ ने रणथंभौर के बाघों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके कार्यों से प्रेरित होकर दुनियाभर के लोग वन्यजीव संरक्षण से जुड़े। डॉ. शर्मा ने वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और लेखन के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके आलेख देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। यह समारोह स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के संरक्षण वादियों के कार्यों को मान्यता देने का एक प्रमुख मंच है। उल्लेखनीय है कि बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की मैगजीन में दुर्लभ व खतरे के निकट पक्षियों, वन्यजीवों, तितलियों, वृक्षों की खोज और वन्यजीव व पक्षियों के संरक्षण से संबंधित विषयों पर आलेख व शोध रिपोर्ट्स के प्रकाशन के साथ ही डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर व जयपुर जिले में आयोजित हुए बर्ड फेस्टिवल की शुरुआत में डॉ. कमलेश शर्मा की सक्रिय भूमिका रही। इसके अलावा कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में बाघों के पुनर्वास के प्रति ग्रामीण जनमानस में पसरी भ्रांतियों को दूर कर जनजागरूकता पैदा करने में सक्रिय भूमिका निभाने, डूंगरपुर में खतरे के निकट घोषित ब्लेक हेडेड आईबीस के सैकड़ों घौंसलों वाले पेड़ काटे जाने पर दो सौ से अधिक पक्षियों व चिक्स को जीवनदान देने, और श्यामपुरा में एक साथ 38 प्रजातियों की पक्षियों की अवस्थिति को उद्घाटित कर इसे वन प्रकृति शिक्षा केन्द्र बनाने की मुहिम चलाने के लिए डॉ. शर्मा का चयन किया गया है।


