वरिष्ठ प्रोफ़ेसर डॉ. वीपी पांडे अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन बन गए हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने शुक्रवार को डीन का पदभार भी ग्रहण कर लिया हैं। दरअसल 30 नवम्बर को पूर्व डीन डॉ. संजय दीक्षित रिटायर हुए थे। इस पर उन्होंने चार्ज एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव को चार्ज सौंपा था। इस पर डॉ. पांडे ने हाई कोर्ट में अपील की थी। उसमें हवाला दिया गया कि वे सीनियर है, उनसे 15 साल जूनियर को कैसे चार्ज दिया गया। दरअसल राजधानी सहित प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर चल रहे विवाद में हाल ही में हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने 10 दिसम्बर को फैसला सुनाया था। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने स्पष्ट किया कि किसी सीनियर प्रोफेसर को जूनियर के अधीन काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसमें दो दिन पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश पांडे को एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर का डीन नियुक्त करने का आदेश दिया था। पांडे की इंदौर में डीन के पद पर सीधी भर्ती से नियुक्ति को चुनौती देने वाली यह याचिका लगी हुई है। इसमें जस्टिस शुक्ला ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि डॉ. पांडे से जूनियर डॉ. अशोक यादव को किस आधार पर डीन का प्रभार सौंपा गया। कोर्ट ने यह पाया कि सरकार ने कोई तथ्य या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों की सुनवाई 7 जनवरी को सरकार के वकील ने तर्क दिया कि प्रोफेसर की गोपनीय रिपोर्ट डीन नहीं बल्कि कमिश्नर व संचालक लिखते हैंं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब 7 जनवरी तक मांगे हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती के मामलों की सुनवाई भी इसी दिन निर्धारित की गई हैं।


