रात का अंधेरा बड़े से बड़े शातिर अपराधियों को भी पुलिस से नहीं बचा पाता। लेकिन, यही अंधेरा डोडा-चूरा तस्करों के लिए हर बार सबसे भरोसेमंद साथी साबित हो रहा है। अजीब संयोग है कि तस्कर हर बार अंधेरे का फायदा उठाकर न केवल फरार हो जाते हैं, बल्कि जाते-जाते गाड़ी और डोडा-चूरा पुलिस के लिए छोड़ जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस की कहानी हर बार वही रटी-रटाई स्क्रिप्ट पर चलती है- नाकाबंदी की गई, तस्करों ने तोड़ दी। फिर पीछा किया गया तो तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर गाड़ी बीच रास्ते में छोड़कर भाग निकले। सवाल यह है कि जब सूचना पुख्ता थी तो पर्याप्त पुलिस बल, रोशनी और प्रभावी घेराबंदी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या हर बार जिम्मेदार सिर्फ अंधेरा ही होता है, या फिर कार्रवाई की रणनीति में कहीं न कहीं गंभीर चूक रह जाती है? तस्करी के खिलाफ सख्ती के तमाम दावों के बीच पुलिस की यह कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। लगता है पुलिस की रोशनी सिर्फ कागजों और बयानों में ही तेज जलती है, जबकि जमीनी हकीकत में अंधेरा हर बार तस्करों का साथ निभा जाता है। लंबी होती जा रही फरारी की सूची पुलिस प्रेस नोट जारी कर बताती है कि देर रात हाईवे पर नाकाबंदी की गई। तभी एक गाड़ी को रुकने का इशारा किया। गाड़ी बिना रुके नाकाबंदी तोड़ जाने लगी। इस पर रोड स्टिक से गाड़ी के टायर बर्स्ट किए। फिर भी गाड़ी नहीं रुकी। पुलिस ने पीछा किया तो कुछ किलोमीटर बाद सड़क किनारे गाड़ी खड़ी मिली। उसमें डोडा-चूरा के कट्टे भरे मिले। चालक अंधेरे का फायदा उठा कर भाग गए। पुलिस ने कार और डोडा-चूरा जब्त कर लिया। प्रेस नोट में जब्ती और कार्रवाई के आंकड़े जरूर चमकते हैं। लेकिन, फरार आरोपियों की सूची भी उतनी ही बढ़ती जाती है। बार-बार आरोपी फरार होने से केस कमजोर पड़ जाते हैं। गवाह और सबूत जुटाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसका फायदा भी आरोपियों को ही मिलता है। केस-1 15 सितंबर 2024 : प्रतापनगर थाना पुलिस ने रात में देबारी टी प्वाइंट पुलिया पर नाकाबंदी की। डबोक से पिंडवाड़ा जा रही स्कॉर्पियो को रुकने का इशारा किया। रफ्तार कम नहीं होने पर रोड स्टिक डालकर टायर पंक्चर किए। फिर भी चालक कार को लेकर 500 मीटर आगे तक ले गया। वहां कार को छोड़कर अंधेरे का फायदा उठा कर भाग गया। केस-2 डोडा-चूरा जब्त। 16 सितंबर 2025 : प्रतापनगर थाना पुलिस ने पिंडवाड़ा हाइवे पर केसरिया बालम कट पर नाकाबंदी की। पिंडवाड़ा की तरफ से आ रही स्कॉर्पियों कार को रुकने का इशारा किया। चालक ने कार नहीं रोकी तो रोड स्टिक बिछा कर टायर बर्स्ट किए। चालक नहीं रुका और एक किमी दूर वह कार छोड़कर पहाड़ियों की तरफ भाग गया। केस-3 10 जनवरी 2026 : देबारी-अंबेरी हाईवे पर देर रात एक कार पलट गई। सूचना के बाद प्रतापनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कार में 436.350 किलो डोडा-चूरा मिला। इसके अलावा देसी पिस्टल मय 6 कारतूस भी मिली। चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने डोडा-चूरा और हथियार जब्त किए। भास्कर एक्सपर्ट- रि. एएसपी ने कहा- तस्करों की गाड़ियां लग्जरी, यही बड़ी वजह
“”डोडा-चूरा तस्करों के भाग निकलने के पीछे कई कारण हैं। लेकिन, प्रमुख कारण पुलिस के संसाधनों का है। पुलिस और तस्करों की गाड़ियों में काफी अंतर है। तस्कर लग्जरी गाड़ियों में चलते हैं। पुरानी गाड़ियों के साथ इनका पीछा करने में पुलिस सफल नहीं हो पाती है। तेज रफ्तार में गाड़ी भगाने पर आमजन के जीवन पर भी खतरा रहता है। तस्कर अधिकतर रात में ही तस्करी करते हैं, ऐसे में वे गाड़ी छोड़ भाग निकलते हैं।”
-घनश्याम शर्मा, रिटायर एएसपी अधिवक्ता ने कहा- पुलिस के तरीकों की जांच होनी चाहिए
“तमाम प्रयासों के बावजूद तस्करों का ना पकड़ा जाना संदेह पैदा करता है। पुलिस ने अपनी कार्रवाई के दौरान किन तरीकों का इस्तेमाल किया, उच्चाधिकारियों को इसकी जांच करनी चाहिए। अगर पुलिस ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है तो यह अभियुक्त के लिए फायदेमंद हो सकता है। बार-बार तस्करों के भागने पर पुलिस की कार्यशैली और छवि पर भी सवाल खड़ा होता है। इससे तस्करों के हौसले भी बुलंद होते हैं।”
-मनीष शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, बार एसो.


