ढाई साल से अटक रहा बांधों की मरम्मत का काम:चंबल के तीनों बांधों की मरम्मत के लिए भेजी डीपीआर 3 महीने से मंजूर नहीं

चंबल नदी पर हाड़ौती में बने कोटा बैराज, जवाहर सागर व राणा प्रताप सागर बांध की मरम्मत का काम ढाई साल बाद भी शुरू नहीं हो सका। वजह- बजट कम होना। मंजूर हुए बजट में कोई संवेदक इसके लिए तैयार नहीं हो रहा। हालांकि विश्व बैंक अब 182.78 करोड़ से 54 करोड़ रुपए बढ़ाकर 236.23 करोड़ की स्वीकृति दे चुका है। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने तीन माह पहले इस कार्य की संशोधित डीपीआर बनाई, जिसकी अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। कोटा बैराज सहित तीनो बांधों पर हाइड्रो मैकेनिक व सिविल कार्य करवाने, गेटों की मरम्मत व नए गेट लगाने सहित अन्य कार्यों के लिए विश्व बैंक ने तीन साल पहले 182.78 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। जल संसाधन विभाग ने दो बार निविदाएं जारी की लेकिन राशि कम होने के कारण कोई बड़ी कंपनी या फर्म सामने नहीं आई। बाद में जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों की दिल्ली में आयोग के अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग के बाद यह राशि 236.23 करोड़ रुपए कर दी गई। विभाग ने अब संशोधित डीपीआर वित्त विभाग को भेजी है जिसे अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। कोटा बैराज तो बरसों से ही तरस रहा मरम्मत को
कोटा बैराज 20 नवंबर 2024 को 64 वर्ष का हो चुका है। मरम्मत के अभाव में बांध जर्जर होता जा रहा है। बांध के पास बने पिरामिड की दीवार से सीमेंट उखड़ चुका है। सरिये साफ दिखाई देने लगे हैं, पिरामिड पूरी तरह से खंड़हर सा दिखाई दे रहा है। बांध के गेट भी कमजोर हो चुके हैं। गेट के लोहे के मोटे तार जंग लगे हैं। तीन बार हो चुके टेंडर लेकिन काम करने कोई ठेकेदार नहीं आया तीनों बांधों की मरम्मत के लिए पहली बार 14 अगस्त 2023 को निविदा जारी की गई थी लेकिन किसी ने टेंडर नहीं भरे। इसी साल 28 दिसंबर को फिर से निविदा जारी की गई, लेकिन इस बार भी कोई कंपनी या फर्म नहीं आई। अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव में आचार संहित लगी तो काम अटक गया। अचार संहिता हटने पर फिर से निविदा जारी की गई लेकिन हाइड्रो मैकेनिक के लिए टेंडर ही नहीं आए। सिविल वर्क ये होने हैं – प्रोटेक्शन दीवार, बैराज गेट, सेफ्टी वाॅल, बांधों में पिचिंग, राउटिंग, रिटेनिंग वाॅल, प्रोटेक्शन वाॅल पेटिंग, लैंड स्लाइडिंग रोकने के लिए प्रोटेक्शन दीवार, गैलरी निर्माण व सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के काम होने हैं। हाइड्रो मैकेनिकल वर्क ये होने हैं – गेट, गेंट्री क्रेन, स्टाॅप लाॅग गेट, रबर सील, लाइटिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, एक्सट्रा पंप, जनरेटर, बंद उपकरणों का काम व स्काडा माॅनिटरिंग के कार्य होने हैं। रोबोटिक सर्वे से तैयार हुई थी डिटेल – तीनों बांधों आरपीएस, जवाहर सागर डैम और कोटा बैराज का अंडर वाटर रोबोटिक सर्वे व हेल्थ असेसमेंट कोविंड-19 के दाैरान अल्ट्रासाउंड तकनीक से करवाया था। जिसमें कई मीटर नीचे रोबोट से डैम के स्ट्रक्चर और दरवाजों के फोटोग्राफ लिए गए, वीडियो बनवाया गया। इसके अलावा डेटा एकत्रित किया गया। सीधी बात – संशोधित डीपीआर मंजूरी का इंतजार ए. अंसारी, एसई, जल संसाधन विभाग
Q. बांधों की मरम्मत शुरू नहीं होने का क्या कारण है?
जवाब: तीन बार टेंडर जारी किए लेकिन कोई बड़ी फर्म सामने नहीं आई। ऐसे में सेंटर वाटर कमीशन ने संवेदकों को बुलाकर चर्चा की तो उन्होंने रेट कम होना बताया। साथ ही पुराने डैम की मरम्मत पर अधिक पैसा लगने की बात कही। Q. 54 करोड़ रूपए की राशि बढ़ने का क्या बड़ा कारण है?
– कोटा बैराज के 19 गेटों का मेटलाइजेशन किया जाना था। लेकिन अब गेटों को ही बदला जाना है। इस पर बढ़ी राशि खर्च होगी। Q.अब संशोधित डीपीआर कहां रूकी हुई है?
-सेंटर वाटर कमीशन से चर्चा के बाद राशि बढ़ने पर जल संसाधन विभाग ने संशोधित डीपीआर बनाकर सरकार के वित्त विभाग को मंजूरी के लिए भेजा गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी अवगत करवाया गया है।

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