छत्तीसगढ़ में हुए 2800 करोड़ के शराब घोटाले में ईडी ने परिवाद पेश किया है। इसमें कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव समेत 29 आबकारी अफसरों को भी आरोपी बनाया गया है। इन्होंने मिलकर की चुनाव के लिए फंडिंग की है। चौंकाने वाली बात यह है कि केके श्रीवास्तव और लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू को आरोपी बनाया गया है, लेकिन ईडी और ईओडब्ल्यू ने इन्हें गिरफ्तार नहीं किया है। वर्तमान में केके श्रीवास्तव जेल में बंद है, जबकि पप्पू बाहर घूम रहा है। दोनों की भूमिका कूरियर मैन की तरह बताई गई है। एजेंसी का दावा है कि सिंडिकेट में चैतन्य बघेल व यश टुटेजा की बड़ी भूमिका थी। एजेंसी का दावा है कि शराब की बोतल में 32 करोड़ डुप्लीकेट होलोग्राम का उपयोग किया गया है। नोएडा से प्रिज्म होलोग्राम की फैक्ट्री से 4014 पेटी डुप्लीकेट होलोग्राम रायपुर भेजा गया था। चुनावी फंडिंग का जरिया बने अफसर
जांच एजेंसी के अनुसार 2023 के विधानसभा चुनाव में आबकारी विभाग से एक राजनीतिक दल को बड़े पैमाने पर फंडिंग की गई। रकम जुटाने की जिम्मेदारी आबकारी उपायुक्त दिनकर वासनिक, नवीन प्रताप सिंह तोमर, विकास गोस्वामी, नीतू नोतानी और इकबाल खान को दी गई थी। इन्हीं अधिकारियों ने चुनाव से पहले जिलों में अपनी पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराई और चुनाव फंड के लिए वसूली की। इतना ही नहीं, चुनाव में उम्मीदवारों को बांटने के लिए शराब भी उपलब्ध कराई गई। दिनकर वासनिक का नाम झारखंड शराब घोटाले में भी आया है। अधिकारियों का 15 जिलों में घोटाला
प्रदेश में शराब घोटाले के लिए जिलों को 8 जोन में बांटा गया था। जोन अनुसार डिस्टिलरी को सप्लाई का काम दिया गया। अवैध शराब की बिक्री 15 जिलों रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, मुंगेली, महासमुंद, कोरबा, कवर्धा, जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, दुर्ग, धमतरी, बेमेतरा, बलौदाबाजार और बालोद में की गई। इन जिलों में पोस्टिंग के लिए मोटी बोली लगती थी। इस दौरान 15 जिलों में 29 अधिकारियों की पोस्टिंग हुई, जो प्रति पेटी पैसा वसूलते थे। इन्हें कुल 90 करोड़ रुपए मिले। तीन पार्ट में कमीशन का खेल चला FL 10ए में 248 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। शराब घोटाले की क्रोनोलॉजी अब तक कुल 22 गिरफ्तारियां


