‘ताजमहल’ पर चला बुलडोजर, क्रेन से हटा ‘एफिल टावर’:ठेकेदार ने की घूसखोर अफसरों की ‘सफाई’; नेताजी को मलाल-‘विधायकी’ का योग नहीं बैठ रहा

नमस्कार आज बात खरी है में पढ़िए- अजमेर में ताजमहल, पीसा की मीनार और एफिल टावर समेत 7 अजूबों पर बुलडोजर चल गया। भरतपुर में चोर इतने हाईटेक हो गए हैं कि ड्रोन से रेकी कर रहे हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए… 1. अजमेर में मटियामेट हुए सात अजूबे आम आदमी का काम है जी-तोड़ मेहनत करना और कमा-कमाकर सरकार को टैक्स देना। सरकारें क्या करेंगी? हमें हमारे ही पैसे से जादूगरी दिखाएंगी। तमाम कानून-नियमों का ताक पर रखकर पिछली ‘जादूगर’ सरकार ने अजमेर में 7 वंडर्स बना दिए। रीलबाजों की मौज हो गई। आनासागर झील के हिस्से में मिट्‌टी भर-भरकर पाट दिया गया। इसके बाद 7 अजूबे तैयार। मामला कोर्ट में चला गया। सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया- यह सब हटाओ। अब क्या ताजमहल और क्या एफिल टावर। सब पर बुलडोजर चल गया। जब ये अजूबे बने तब भी जनता की जेब का पैसा था और अब हटाए जा रहे हैं तब भी जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा ही खर्च हो रहा है। जिन अफसरों ने एनजीटी और तमाम गाइडलाइन को ताक पर धर दिया उनसे वसूली क्यों नहीं होती? 2. भरतपुर में ड्रोन वाले हाईटेक चोर समय बदल गया है। किसी जमाने में चोर हाथ-पैरों पर तेल रमाकर, नंगे पैर चोरी करने निकलते थे। अब चोर रिमोट थामकर किसी ऊंची जगह मौज काटते हुए बैठते हैं। ड्रोन उड़ाकर गलियों की रेकी करते हैं। कहां-किधर से सेंध मारी जा सकती है। किधर से निकला जा सकता है। भरतपुर के तुहिया गांव में का ड्रोन शो देख लोग डर रहे हैं। रातभर जागकर गांव वाले पहरेदारी कर रहे हैं। हर आहट पर चौंकते हैं। पुलिस को खबर ही नहीं। कप्तान साहब बोले- देखेंगे, जांच कराएंगे क्या मामला है। ज्यादा जोर देने पर वासेपुर फिल्म जैसा डायलॉग सुनाते हैं-परमिशन लेना चाहिए। बिना परमिशन ड्रोन उड़ रहे हैं तो चेक करेंगे, सूचना तंत्र एक्टिव करेंगे। गांववालों को भी पता है। पुलिस के भरोसे रहे तो हाईटेक चोर कमाल दिखा जाएंगे। इसलिए घूम रहे हैं रातभर बाइक से पहरेदारी करते। 3. नेताजी का विधायकी का ‘योग’ नहीं बैठ रहा थप्पड़कांड वाले नेताजी इन दिनों अपने जैसे लड़ाके ढूंढ रहे हैं। लड़ाका मित्र के लड़के की बर्थडे पार्टी मनाने झुंझुनूं जा रहे थे। सीकर के श्रीमाधोपुर से गुजर रहे थे। उत्साही समर्थकों ने स्वागत करने के लिए रोक लिया। यहां नेताजी ने दिल का दर्द बयान कर दिया। घर के सदस्यों की राजनीतिक पोजिशन का बखान करते हुए बोले-क्या ही करें, इतना होने पर भी विधायकी का योग नहीं बैठ रहा। झुंड में खलबली मची। एक सुझाव आया- क्यों भैया! किसी भी पार्टी का टिकट लो और लड़ लो विधायकी। नेताजी ने मुंह लटकाकर कहा- क्या करूं? मेरे साथी मुझे लीडर की तरह देखना चाहते हैं और पार्टियों को चाहिए झंडा उठाने वाले, झुककर चलने वाले। हमसे तो ऐसा नहीं होता। यही बात है बस, बैलेंस नहीं बैठ रहा। 4. चलते-चलते… लालच बुरी बला है। भ्रष्ट अफसरों का पेट अंधी कुई की तरह होता है। जितना डालो उतना कम। एक ठेकेदार ने धौलपुर के भ्रष्ट अफसरों को खूब मजा चखाया। धौलपुर के अफसरों ने एक ठेकेदार से शहर में साफ-सफाई और पानी की निकासी का काम कराया। ठेकेदार ने बिल बनाकर अफसरों को दे दिया। अफसरों की नीयत में खोट आ गया। ठेकेदार का बिल पास करने के लिए 3 लाख से ज्यादा की घूस मांग ली। फिर क्या था। सफाई का काम करने वाले ठेकेदार ने घूसखोरों की सफाई का संकल्प ले लिया और पहुंच गया एसीबी के दफ्तर। फिर तो ठेकेदार ने ऐसी झाड़ू चलाई कि क्या अफसर और क्या अफसर के कारकून। सब लाइन में लग गए। सड़कों पर झाड़ू लगे, न लगे। शासन-प्रशासन में ऐसी सफाई होते रहनी चाहिए। जय-जय राजस्थान। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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