ताजे फूलों से महका श्री सांवलियाजी का प्राकट्य स्थल:9 क्विंटल के अलग-अलग फूलों से हुई सजावट, भक्तों ने किया 4.50 लाख रुपयों का खर्चा

श्री सांवलिया जी प्राकट्य स्थल मंदिर में नववर्ष के मौके पर फूलों से सजावट की गई। मंदिर के सजावट में लगभग 9 क्विंटल अलग-अलग वैरायटी के फूलों का इस्तेमाल हुआ है। यह फूल रतलाम, इंदौर, पुणे, बैंगलोर से मंगवाया गया। माली समाज के 45 से 50 जनों की टीम द्वारा ये सजावट की गई है। इसमें लगभग 4.50 लाख रुपयों का खर्चा हुआ है। टीम पिछले 8 सालों से मंडफिया स्थित श्री सांवलिया जी मंदिर में सजावट करती आई है। लेकिन ज्यादा भीड़ के कारण इस साल मंडफिया में सजावट नहीं की। इस बार पहली बार प्राकट्य स्थल मंदिर में सजावट की गई। अलग-अलग ताजे फूलों से हुई सजावट नए साल में लोग जहां होटलों में पार्टी करने जाते है। वहीं सांवरा सेठ के भक्तों की एक टोली ने मंदिर के सजावट कर रहे है। माली समाज के 45 से 50 भक्त पिछले 8 सालों से न्यू ईयर पर मंडफिया स्थित श्री सांवलिया जी मंदिर में सजावट करते है। लेकिन ज्यादा भीड़ होने के कारण भक्तों की टोली ने इस बार श्री सांवलिया जी प्राकट्य स्थल मंदिर पर सजावट करने का फैसला किया था। पूरे मंदिर में कट फ्लावर, जरबेरा, ऑर्किड, सनफ्लावर, विक्टोरिया, गेंदा, सेवंती, बिजली, गुलाब, डिवाइंड, रजनीगंधा फूलों से सजावट हुई है। सभी भक्त एक पिकअप गाड़ी में लगभग 9 क्विंटल फूल लेकर आए थे। इसमें कुल 4.50 लाख रुपयों का खर्चा हुआ है, जो भक्तों ने मिलकर दिया है। इसके अलावा मंदिर परिसर में बैलून से भी सजावट की गई है। वहीं रात के 12 बजे भव्य आतिशबाजी भी की गई। माली समाज की सांवरा सेठ के लिए पहल भक्तों ने बताया कि वे सभी माली समाज के होने के कारण उनका यही काम है। बचपन से ही उन सबका श्री सांवलिया जी में आना होता था। धीरे धीरे वे लोग आपस में जुड़ने लगे। रवि भाटी, कान्हा सोलंकी, शुभम दगदी, गोपाल दगदी, संजय दगदी, अशोक पचावा, अनिल भाटी ने बताया कि एक दिन उनके मन में आया कि शादी ब्याह और पार्टियों में तो ये काम करते ही है। क्यों ना साल में एक बार वे सब मिलकर सांवरा सेठ के दरबार को सजाए। इसलिए उन्होंने इसके लिए 31 दिसंबर का दिन चुना। इस दिन सभी अपने अपने क्षेत्रों से श्री सांवरा सेठ के दर पर आते है और सजावट करते है। सभी भक्त मध्य प्रदेश के इंदौर, रतलाम और चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ीसादड़ी इलाके से आते है। परेशान भक्त भी खुशबू से हो ठीक, पर्यावरण भी रहे ठीक, इसलिए प्राकृतिक फूलों का इस्तेमाल उन्होंने बताया कि हर साल हम लोग सिर्फ प्राकृतिक फूलों का ही इस्तेमाल करते हैं। जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। आने वाले भक्तों को फूलों की ताजा खुशबू मिलती रहे। मंदिर में कई भक्त ऐसे भी होते हैं जो अपने परेशानी लेकर आते हैं, कहा जाता है कि ताजे फूलों की खुशबू से मूड भी सही हो जाता है। इंदौर से हमने कट फ्लावर, पुणे से जरबेरा, विक्टोरिया, बेंगलुरु से ऑर्किड और सनफ्लावर, रतलाम से बिजली गुलाब डिवाइंड और रजनीगंधा के फूल लाए थे। फूलों के अलावा पूरे मंदिर परिसर में बैलून से भी सजावट की गई है। अलग-अलग तरह के हार भी बनाए उन्होंने बताया कि इसके अलावा ठाकुर जी के लिए एक मेलोडी चॉकलेट का हार, तीन हार मोर पंख के, एक हार जिसे फूलों और 10, 20 और 100 रुपए के नोटों से बनाया गया है।

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