तीन दिशाओं का ट्रैफिक हो रहा मर्जर:15 साल पहले बने दोमोरिया पुल फ्लाईओवर के एंट्री-एग्जिट पॉइंट पर हादसों का खतरा

भास्कर न्यूज | जालंधर दोमोरिया पुल फ्लाईओवर रेलवे स्टेशन एरिया में ट्रैफिक का दबाव बढ़ने के बावजूद भी फुल मोड पर नहीं चल रहा है। ये पुल 1860 में बने अंडरपास के छोटा होने के कारण बनाया गया था। लेकिन पिछले 15 साल से इस रूट के 90 प्रतिशत वाहन चालक अंडरपास से ही गुजर रहे हैं। तब भी जब, पीकआवर्स में जाम लगा होता है। इसकी वजह ये है कि दोमोरिया पुल फ्लाईओवर के एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर 3-3 दिशाओं का ट्रैफिक मर्ज हो रहा है। जब पुल बना था तो सिटी में 11 लाख वाहन थे। अब ये गिनती दोगुनी हो गई है लेकिन मर्जिंग पॉइंट की रि डिजाइनिंग नहीं की गई है। दूसरी दिक्कत ये है कि पुल के ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा जीजीएस एवेन्यू के रास्ते हाईवे की तरफ जाना था। ये रोड काजी मंडी के कब्जों के कारण बंद है। केवल हलके वाहन ही गुजर सकते हैं। रोड सेफ्टी कमेटी के माहिर सुरिंदर सैनी का कहना है कि एक तो उक्त रोड खोली जाए, दूसरी तरफ पुल के एंट्री व एग्जिट पॉइंट में ट्रैफिक मर्जिंग के दौरान बनने वाले खतरे को दूर किया जाए। दैनिक भास्कर के सवाल पर जालंधर के मेयर वनीत धीर ने कहा कि माहिरों से रोड सेफ्टी की दिक्कतों को लेकर सर्वेक्षण करवाया जाएगा। कब्जे हटाकर काजी मंडी का बंद रास्ता खोले 1. बरसात के दिनों में सर्वाधिक लोग फ्लाईओवर का प्रयोग करते हैं। तब सारी दिक्कतें सामने आ जाती हैं। दोमोरिया रेलवे ओवरब्रिज पर जब वाहन चढ़ते तथा उतरते हैं तो सड़कें संकरी हैं। रेलवे स्टेशन की तरफ से जब वाहन उपर चढ़ते-उतरते हैं तो ओल्ड रेलवे रोड व ढन्न वुड मार्केट का ट्रैफिक मर्ज होता है। जरूरत है कि यहां ब्लिंकर व ट्रैफिक सिग्नल लगाकर ट्रैफिक प्रबंधन किया जाए। 2. जब ट्रैफिक इकहरी पुली की तरफ उतरता है तो सामने ही लोग इकहरी पुल में प्रवेश कर रहे होते हैं। ट्रैफिक इस कारण आमने-सामने आ जाता है। इसका हल निकालना होगा। 3. जब काजी मंडी की तरफ वाहन उतरते हैं तो हाईवे की तरफ जाने वाली 120 फीट रोड कब्जों से घिरी दिखती है। जब ट्रक यू टर्न लेकर किशनपुरा की तरफ आता है तो कोने पर कूड़े का विशाल ढेर लगा मिलता है। 4. जब किशनपुरा की तरफ आया ट्रैफिक दोमोरिया रेलवे ओवरब्रिज पर चढ़ता है तो संकरी रोड पर ट्रैफिक मर्जर से दिक्कत होता है। 5. अब नगर निगम दोबारा ट्रैफिक सेफ्टी मैनेजमेंट का माहिरों से दोबारा सर्वे करवाए। पुल के ऊपर स्पीड कंट्रोल, जरूरत के अनुसार वन-वे तय करने होंगे। रेलवे स्टेशन के पास रेल पटरी के नीचे दोमोरिया पुल में पानी भर जाता था। ऐसे में 1999 में नगर निगम ने यहां फ्लाईओवर बनाने की योजना पर काम आरंभ किया। रेलवे से मंजूरियों व फंड पर मुहर लगने के बाद 2004 में निर्माण शुरु हुआ। पिलर बनने के बाद रेल पटरी के ऊपर रेलवे ने गार्डर फिट करने थे। रेलवे का ये काम 2010 में पूरा हुआ। जब फ्लाईओवर बनकर तैयार हो गया तो लोग जटिल डिजाइन और एंट्री-एग्जिट पर जगह कम होने के कारण गुजरते ही नहीं थे। अब ये फ्लाईओवर फुल मोड पर चलेगा। जमीनी रास्ता केवल टू व्हीलर-रिक्शा आदी के लिए बचेगा। रोजाना एक लाख से अधिक वाहन इस रूट पर चलते हैं। अब उनके लिए रेलवे ओवरब्रिज लाइफलाइन बनेगा। सुरिंदर सैनी, डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमेटी मेंबर तेज रफ्तार में इन स्पॉट पर अक्सर हादसे होते हैं। इसलिए लोग पुल का इस्तेमाल नहीं करते।

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