तेतुलिया मौजा जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश:बोकारो डीसी मूल दस्तावेज के साथ हो हाजिर, अधिकारियों पर की गई कार्रवाई पर लगाई रोक

बोकारो जिले के चर्चित तेतुलिया मौजा भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा बोकारो वन प्रमंडल के दो अधिकारियों पर शुरू की गई अवमानना कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। वन अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ वन विभाग के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। इस याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाईकोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाई, बल्कि मामले में नए निर्देश भी जारी किए। डीसी को मूल खतियान के साथ उपस्थित होने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने बोकारो के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे तेतुलिया मौजा से संबंधित मूल खतियान दस्तावेज के साथ कोर्ट में उपस्थित हों। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिले में भूमि रिकॉर्ड की जिम्मेदारी उपायुक्त की होती है, और उन्हें छह सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रस्तुत दस्तावेज की उत्पत्ति क्या है और वह किस आधार पर प्रमाणित है। दस्तावेज की जांच और यथास्थिति का निर्देश सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष विवादित भूमि से संबंधित सर्टिफाइड खतियान की सॉफ्ट कॉपी पेश की गई। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दस्तावेज की वैधता की जांच आवश्यक है। साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि विवादित भूमि पर वर्तमान स्थिति को बनाए रखा जाए। यानी वहां कोई नया निर्माण, बदलाव या सरकारी कार्रवाई नहीं होगी जब तक अगली सुनवाई नहीं हो जाती। अगली सुनवाई 24 जुलाई को अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई 2025 को तय की गई है। इसे इस लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद के संभावित निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सभी की नजरें अब बोकारो डीसी द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने वाले खतियान दस्तावेज और सुप्रीम कोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।

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