थानागाजी गैंगरेप के दोषी इंद्राज को हाईकोर्ट से एक महीने की पैरोल मिली है। जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने मानवीय आधार पर उसे पैरोल दी है। इंद्राज की ओर से उसकी गर्भवती पत्नी ने याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि वो गर्भवती है, इसी महीने उसकी डिलीवरी की डेट है। घर में उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में इस समय उसे अपने पति के साथ की जरूरत है। गौरतलब है कि थानागाजी गैंगरेप में इंद्राज सहित चार आरोपियों को अलवर की एडीजे कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2020 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इंद्राज इसी साल मार्च महीने में 20 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आया था। जेल सुपरिटेंडेंट ने खारिज कर दिया था प्रार्थना पत्र
याचिकाकर्ता के वकील गोविंद प्रसाद रावत ने बताया- इंद्राज अलवर सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है। उसने जिला कलेक्टर के पास 15 दिन की पैरोल के लिए अलवर जेल सुपरिटेंडेंट के यहां प्रार्थना पत्र दायर किया था। जेल सुपरिटेंडेंट ने अपने स्तर पर ही 5 नवंबर को उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इसके बाद उसकी ओर से उसकी पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें हमने कोर्ट से कहा- राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-2021 के संशोधित नियमों के तहत दोषी को मानवीय आधार पर पैरोल दी जा सकती है। हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से कहा गया था कि आरोपी को 30 जून 2021 से पहले सजा हो चुकी है। ऐसे में उस पर संशोधित नियम लागू नहीं होते हैं। उसे पैरोल नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद याचिकाकर्ता को 30 दिन की पैरोल पर रिहा करने के आदेश दिए। पति के सामने किया था महिला से गैंगरेप
दरअसल, 26 अप्रैल 2019 को थानागाजी के रहने वाले दंपती बाइक पर जा रहे थे। तभी पांच युवकों ने उनका पीछा करके रोक लिया। इसके बाद युवक पति-पत्नी को जबरन जंगल ले गए। वहां महिला के साथ पति के सामने सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद पीड़ित पति-पत्नी थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने चुनाव में व्यस्त होने की बात कहकर केस दर्ज नहीं किया। दोषियों ने घटना का वीडियो भी बनाया था। वीडियो वायरल होने पर 2 मई को घटना के 6 दिन बाद थानागाजी थाने में केस दर्ज हुआ। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के 16 दिन बाद ही कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। जज ने कहा था द्रौपदी के चीरहरण जैसी घटना
मामले में कोर्ट ने सभी 5 आरोपियों को घटना का दोषी माना था। चार दोषियों इंद्राज, अशोक, छोटेलाल और हंसराज को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं वीडियो वायरल करने के दोषी मुकेश को 5 साल की सजा मिली थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गैंगरेप की यह वारदात द्रौपदी के चीरहरण जैसी है। इसमें सजा ऐसी होनी चाहिए कि दुष्कर्म की घटनाओं की अमर बेल (लगातार हो रही घटनाओं) को काटा जा सके।


