पंचायत समिति मुख्यालय की मांग को लेकर अलाय क्षेत्र के ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले 17 दिसंबर से पशु प्रदर्शनी स्थल पर अनवरत धरने पर बैठे ग्रामीणों ने शुक्रवार को एक बार फिर अपने अनूठे अंदाज में सरकार का ध्यान खींचने का प्रयास किया। ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर में हाथों में थालियां लेकर पहुंचे और उन्हें जोर-जोर से बजाते हुए प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट के बाहर गूंजती थालियों की आवाज के बीच ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी वाजिब मांग पर तुरंत अमल करने की अपील की। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पिछले 38 दिनों से इस हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। असंवेदनशीलता का आरोप और हक की लड़ाई का संकल्प प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए और प्रशासन पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और अपने संवैधानिक हक की लड़ाई है। आंदोलनकारियों ने दोहराया कि जब तक सरकार श्रीबालाजी अलाय पंचायत समिति का मुख्यालय आधिकारिक रूप से अलाय घोषित नहीं कर देती, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा। ग्रामीणों के अनुसार, वे हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं और मांग पूरी होने तक पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता। लगातार जारी है विरोध के अलग-अलग तरीके उल्लेखनीय है कि ग्रामीण अपनी मांग मनवाने के लिए लगातार अलग-अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दो दिन पूर्व ही प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के समक्ष अर्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया था, जिसने पूरे जिले का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया था। आंदोलन के लंबा खिंचने और ग्रामीणों के अडिग रुख ने अब प्रशासन के सामने भी चुनौती पेश कर दी है। ग्रामीणों का तर्क है कि अलाय मुख्यालय बनने से न केवल स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कार्यों में सुविधा होगी, बल्कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को भी नई गति मिलेगी।


