रमजान खान | रतननगर एनएच 52 पर स्थित थैलासर ग्राम पंचायत का इतिहास करीब 300 साल पुराना है। इतिहास में रुचि रखने वाले बजरंगसिंह राठौड़ ने बताया कि थैलासर पंचायत व रतननगर पालिका की सीमाएं मिली हुई हैं। थैलासर गांव रतननगर से करीब 100 साल पहले बसा था। हाइवे पर पहले थै बसा हुआ था,(पुरात्न गांव था, जिनका कोई नाम नहीं होने के कारण उसे थै कहा जाता है)। थै में किसी समय महामारी फैली। काफी लोगों की मौत हो गई, तो वहां के परिवार यहां आकर बस गए और गांव का नाम थैलासर रखा। थैलासर गांव की पहली जागीरदारी जसरासर के ठाकुर जैतसिंह को मिली। उन्होंने यहां ठाकुरजी का मंदिर बनवाया। 300 साल पुराना मंदिर आज भी है। जैतसिंह के भाई जैसिह के बेटे उम्मेद सिंह ने गांव में गढ़ बनवाया। ठाकुर जैतसिंह कांधलजी के वंशज माने जाते हैं। वर्तमान में इनकी नौवीं पीढ़ी यहां निवास कर रही है। करीमशाह बाबा की दरगाह भी है। पंचायत क्षेत्र में धार्मिक दृष्टि से दो मस्जिद, करणी माता का मंदिर, बालाजी बगीची हैं। थैलासर को मेघसर देपालसर, हनुवंतपुरा, ढाणियों को मिलाकर कर 1959 में ग्राम पंचायत का दर्जा मिला। पहले सरपंच रतननगर के सांवरमल सोनी बने। तीसरे सरपंच मानसिंह बने, जिन्होंने गांव में प्राथमिक स्कूल शुरू करवाया, जो वर्तमान में शहीद जितेंद्र सिंह राउमावि के नाम से है। यहां के कर्नल जयसिंह के नेतृत्व में 1965 का भारत-पाक युद्ध लड़ा गया। तनोटगढ़ माता मंदिर जैसलमेर के पास स्थित भारतीय चौकी की रक्षा कर्नल जयसिंह व उनकी टुकड़ी ने बहादुरी से की थी। कर्नल जयसिंह के तन जाए तनोट न जाए के संकल्प ने सैनिकों में जोश भरा था। इसका चूरू कलेक्ट्रेट के आगे विजय स्तंभ भी बना हुआ है, जिस पर तनोटगढ़ के विजयश्री का पूरा शिलालेख लिखा हुआ है। वर्तमान पंचायत में थैलासर के अलावा ऊंटवालिया व हनुवंतपुरा गांव शामिल हैं। प्रशासक ऊंटवालिया के वीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य करवाए गए हैं। 40 लाख की लागत से ऊंटवालिया के कब्रिस्तान की चारदीवारी, खुर्रा निर्माण, ग्रेवल सड़क, थैलासर में खुरा निर्माण सहित कई काम करवाए हैं। जनसंख्या : 5000 साक्षरता दर : 90% जिला मुख्यालय से दूरी : 9 किमी कनेक्टिविटी : एनएच 52 प्रमुख उत्पादन : बाजरा, ग्वार आय का प्रमुख स्रोत : कृषि


