दंतेवाड़ा में की गई 7 करोड़ 65 लाख की 13 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ते की खरीदी

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में इस वर्ष तेंदूपत्ता का व्यापार 7 करोड़ 65 लाख का हुआ। जिले में इस बार 19 हजार 2 सौ मानक बोरा संग्रहण का था लक्ष्य पर खरीदी 13 हजार 909.94 मानक बोरा ही पत्ते का संग्रहण हो पाया। जिले में इस बार 21 हजार 2 सौ संग्राहकों में 13 हजार 536 संग्राहकों ने पत्ते का संग्रहण किया। जिले में इस बार बारिश और आंधी की वजह से पत्ता की खरीदी ज्यादा प्रभावित हुई, बारिश होने से पत्ते जल्दी हार्ड हो गए और ओले गिरने से भी संग्राहकों को खासा नुकसान हुआ। बस्तर में तेंदूपत्ते को हरा सोना के नाम से भी जाना जाता है, आदिवासियों की 5 से 6 दिनों के संग्रहण में ही अच्छी खासी आमदनी हो जाती है, 10 से 15 हजार तक कई ग्रामीण तेंदूपत्ता के सीजन में कमाई करते हैं, पूरे परिवार के साथ तेंदूपत्ते का संग्रहण किया जाता है। इस बार तेंदूपत्ता की सारी कमाई संग्राहक की, नक्सलियों की कोई हिस्सेदारी नहीं 152 गांवों में हुई खरीदी सबसे कम कटेकल्याण में जिले में इस बार 152 गांवों में तेंदूपत्ता की खरीदी की गई, सबसे कम कटेकल्याण समिति में खरीदी हुई यहां 12 गांवों में महज 26 .435 मानक बोरा तेंदूपत्ता की खरीदी ही हो पाई जबकि समिति को 900 मानक बोरा का लक्ष्य दिया गया था। नकुलनार अ में 1244.108 मानक बोरा और ब मेंं 849.524 मानक बोरा की खरीदी की गई। मोखपाल समिति में लक्ष्य से अधिक खरीदी की गई यहां 1700 का लक्ष्य था 2136.878 बोरा खरीदी हुई, दंतेवाड़ा में 2353.40 बड़े तुमनार अ में 1218.475, ब में 1191.169, गीदम अ में 1140.40, ब में 1574.60, बारसूर अ में 1417.795, ब में 757.570 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया। जिले में सभी समितियों को अलग-अलग लक्ष्य तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए दिया गया था। इस बार तेंदूपत्ता की सारी राशि सीधे संग्राहक के खाते में ट्रांसफर की जा रही है, डीएफओ सागर जाधव ने बताया जिले में 100 प्रतिशत संग्राहकों के खाते खुले हुए हैं, नगद भुगतान कहीं भी नहीं किया जाएगा। सरकारी खरीदी से सबसे बड़ा झटका नक्सलियों को लगा है, संग्राहकों को तेंदूपत्ता की मिलने वाली राशि में हर गांव में उनकी बराबर की हिस्सेदारी होती थी, पर अब दंतेवाड़ा में 100 प्रतिशत ऑनलाइन भुगतान होने और क्षेत्र में नक्सलियों पर अंकुश लगने की वजह से ग्रामीण स्वतंत्र हो गए हैं। सबसे ज्यादा बुरगुम, पोटाली, नहाड़ी, मारजूम, निलावाया में तेंदूपत्ता संग्राहक दहशत में रहते थे, पर इस बार इन गांवों में बिना किसी डर के तेंदूपत्ता का संग्रहण हुआ।

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