भास्कर न्यूज|दामापुर ग्राम सैहामालगी इन दिनों शिवमय हो गया है। गांव में आयोजित 7 दिवसीय श्री शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कथा व्यास संत विकास आनंद महाराज ब्रह्मचारी (काशी) ने कथा प्रसंग में माता पार्वती के जन्म की पावन गाथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान सहकर शरीर त्याग दिया, तब भगवान शंकर विरह वेदना में डूब गए। सती ने शरीर त्यागते समय यह संकल्प लिया था कि वे पुनः जन्म लेकर भगवान शिव को ही पति रूप में प्राप्त करेंगी। कथा में महाराज ने बताया कि उचित समय आने पर सती ने हिमालयराज के यहां मैना रानी के गर्भ से जन्म लिया और पार्वती के नाम से प्रसिद्ध हुईं। बाल्यकाल से ही पार्वती के मन में शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और प्रेम था। देवर्षि नारद ने उनके भाग्य का संकेत देते हुए शिव-पार्वती विवाह की भविष्यवाणी की थी। इसके बाद पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावुक हुए श्रोता: कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते समय श्रद्धालु भावुक हो उठे। महाराज ने कहा कि सच्ची भक्ति, धैर्य और संकल्प से असंभव भी संभव हो जाता है। पार्वती की तपस्या हमें यह संदेश देती है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए दृढ़ निश्चय और समर्पण आवश्यक है। कथास्थल को आकर्षक ढंग से सजाया: कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। भव्य पंडाल, सुसज्जित मंच और मधुर भजन-कीर्तन से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और प्रसाद की भी उत्तम व्यवस्था की गई है।


