दतिया में रेबीज संक्रमण से संभावित छह वर्षीय बच्चे की मौत के बाद परिजनों और मोहल्ले में भारी आक्रोश है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। चिकित्सकीय मानकों के अनुसार, यदि किसी रेबीज संदिग्ध मरीज की लार के सीधे संपर्क, काटने या खरोंच जैसी स्थिति बनी हो, तो संबंधित लोगों को एहतियातन एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है। सोमवार को बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में सीएमएचओ डॉ. बी.के. वर्मा, जिला चिकित्सालय के डॉ. अरुण शर्मा और महामारी विशेषज्ञ मनोज गुप्ता शामिल थे। स्वास्थ्य अमले ने परिजनों को समझाया कि एंटी-रेबीज वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और यह केवल उन मामलों में दी जाती है, जहां चिकित्सकीय जोखिम की आशंका होती है। परिजनों ने वैक्सीनेशन कराने से इनकार किया
हालांकि परिजनों ने वैक्सीनेशन कराने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक स्वास्थ्य विभाग लिखित रूप में इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता, तब तक वे टीकाकरण नहीं कराएंगे। टीम करीब आधे घंटे तक मौके पर मौजूद रही और लगातार समझाइश देती रही, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। अंततः स्वास्थ्य विभाग की टीम को बिना वैक्सीनेशन किए लौटना पड़ा। इधर, मृतक बच्चे हंस के पिता अशोक प्रजापति ने जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों और नगर पालिका पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज, निगरानी और सतर्कता बरती जाती, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इस मामले में कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों में भी नाराजगी
घटना के बाद मोहल्ले में भय और नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को हादसे का कारण बताते हुए नगर पालिका के खिलाफ ज्ञापन तैयार किया है। मोहल्लावासियों की मांग है कि क्षेत्र में घूम रहे आवारा कुत्तों को तत्काल पकड़ा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।


