भोपाल शहर यूं तो करीब 413 वर्गकिमी में फैला है, लेकिन यहां स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत सीमित है। खेल मैदानों के लिए जमीन आवंटन अफसरों और राजनेताओं की प्राथमिकता में नहीं है। नतीजा यह है कि स्पोर्ट्स में अपना भविष्य तलाश रहे हजारों युवा आज भी पार्कों, स्कूल मैदान और छोटे स्पोर्ट्स फ्लोर के भरोसे अभ्यास करने को मजबूर हैं। यहां उन्हें सरकारी योजनाओं के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। भोपाल के टीटीनगर स्टेडियम में सभी खेलों की सुविधाएं हैं, लेकिन अयोध्या नगर जैसे दूरस्थ इलाकों से इसकी दूरी करीब 14 किमी है। बस कनेक्टिविटी भी अच्छी नहीं है। फिर भी निजी व्यवस्था से कोई बच्चा स्कूल से लौटने के बाद स्टेडियम ज्वाइन भी कर ले तो ज्यादातर वक्त आने-जाने में ही गुजर जाएगा। रोज दो-तीन घंटे अभ्यास भी करना होगा। यही खेल सुविधाएं घर के पास मिल जाएं तो वक्त बचेगा। बंजारी कोलार और बैरागढ़ में स्टेडियम बनने की कगार पर हैं, लेकिन खेल गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं। बरखेड़ा नाथू स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स पूरा होने में काफी समय है। भोपाल के ग्राउंड्स में केवल फैंसी क्रिकेट की तैयारी संभव ओल्ड कैंपियन और बाबे अली मैदान मानकों के अनुरूप नहीं
प्रोफेशनल क्रिकेट के मानकों के अनुसार, ग्राउंड बाउंड्री रेडियस कम से कम 65 यार्ड होना चाहिए। भोपाल में खेल विभाग के पास दो क्रिकेट ग्राउंड ओल्ड कैंपियन व बाबे अली हैं। ओल्ड कैंपियन 40-42 और बाबे अली 60 यार्ड का है। यानी यहां इंटर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट टूर्नामेंट भी मुश्किल है। आयोजकों को ज्यादा खर्च कर निजी ग्राउंड जाना पड़ता है। नई कॉलोनियों के निर्माण के दौरान खेल मैदान जरूरी
यूआरडीपीएफआई गाइडलाइंस भारत में शहरी नियोजन की स्टैंडर्ड गाइडलाइंस हैं। मप्र खेल नीति-2005 के बिंदु क्रमांक 1.6 में स्पष्ट है कि नई कॉलोनियों के निर्माण के दौरान खेल मैदान जरूरी है। लेकिन, अब तक किसी भी कॉलोनी की बिल्डिंग परमिशन खेल मैदान न होने के कारण कैंसल होने का एक भी उदाहरण नहीं है। इन इलाकों में रहती है शहर की 45 फीसदी आबादी
अयोध्या नगर, नर्मदापुरम रोड, बागसेवनिया, मिसरोद, कटारा हिल्स, बावड़िया कला, करोंद, एयरपोर्ट रोड, भौंरी, गांधी नगर, लांबाखेड़ा, ईंटखेड़ी जैसे क्षेत्रों में न एक भी स्टेडियम है न ही मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स। इन इलाकों में भोपाल की सबसे ज्यादा नई बसी कॉलोनियां हैं। शहर की करीब 45% आबादी इन्हीं इलाकों में रहती है। संचालक बोले… नए विकसित इलाकों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाएंगे
वर्ष 2017 में स्टेडियम पॉलिसी बनाई गई थी। इसके तहत प्रदेश के आठों संभाग, सभी 57 जिलों और 313 ब्लॉक स्तर पर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स या स्टेडियम बनाने की योजना है। आठों संभागों में काम अंतिम चरण में है, जबकि 48 जिलों और 120 ब्लॉकों में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बन चुके हैं। जो क्षेत्र अब भी अनकवर्ड हैं, वहां जल्द योजना को शासन की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा। इसमें भोपाल के नए विकसित इलाके भी शामिल होंगे। – अंशुमान यादव, खेल संचालक मप्र


