इंदौर | कब कौन सी श्वास जीवन की अंतिम श्वास बन जाए कोई ठिकाना नहीं। फिर भी जीवन का यह व्यामोह छूटता नहीं। ये िवचार मुनि प्रमाण सागर महाराज ने आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर छत्रपति नगर के मानस्तंभ वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा- आंतरिक स्वरूप तो जीवन का रूपांतरण है। पूरा जीवन व्यापार और मौज मस्ती में ही निकल गया। विचार करो यह मनुष्य जीवन क्यों पाया..। मनुष्य जीवन में ही इस भेद विज्ञान को समझ सकते हो। अन्य प्राणियों को तो समझने की बुद्धि ही नहीं। इस भव में भी नाम रूप, पद, प्रतिष्ठा में उलझकर रहोगे तो संसार के इस चक्र से कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे। इस अवसर पर मुनि निर्वेग सागर महाराज, मुनि संधान सागर महाराज सहित सभी क्षुल्लक मंचासीन थे। प्रचार प्रमुख राहुल जैन एवं प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया गुरुवार से से तीन दिनी वेदी प्रतिष्ठा कार्यक्रम विधानाचार्य अभय भैया, अनिल भैया के निर्देशन में एवं पं. सुदर्शन व अमित वास्तु के सह निर्देशन में दलालबाग में शुरू हुआ। कार्यक्रम 14 दिसंबर तक चलेगा। मुनिश्री के प्रवचन सुबह 9 बजे से, शाम 5.45 बजे शंका समाधान का कार्यक्रम होगा।


