खंडवा में दो दोस्त एक शादी समारोह में शामिल होकर दावत का आनंद ले रहे थे। इसी बीच पुलिस पहुंच गई और साथ लेकर थाने ले आई। उन्होंने पुलिस से पूछा कि हमारा क़सूर क्या है? यह सुन पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। रिकॉर्ड देखा तो उनके खिलाफ 1981 में गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने का प्रकरण हुआ था। पुलिस ने फरियादी को सूचना दी तो वह भी अपराध भूल चुका था। दरअसल, पुलिस ने 1982 में कोर्ट में चालान पेश किया था। पुलिस ने दोनों आरोपी शकील पिता रशीद (19) और हमीद पिता मेहराब खान (25) को फरार बता दिया था। अब इसी महीने कोर्ट ने स्थायी वारंट जारी किया, इस संबंध में पुलिस अधीक्षक ने तामिली के निर्देश दिए। दोनों फरार आरोपियों के संबंध में प्रधान आरक्षक रफीक खान को सूचना मिली। दोनों आरोपी एक शादी समारोह में शामिल होने खंडवा आए हैं। पुलिस मौके पर पहुंची तो दावत हो रही थी। दोनों आरोपियों से पूछताछ की और थाने ले आए। 42 साल से फरार चल रहे शकील की उम्र 67 साल था व 35 साल से फरारी काट रहे हमीद की उम्र 68 साल पाई गई। दोनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई। शकील इतने दिनों से महाराष्ट्र के वाशिम तथा हमीद पुणे में निवास कर रहा था। उनके साथ फरियादी भी इस अपराध को भूल गया था।


