भास्कर न्यूज | राजनांदगांव दिग्विजय कॉलेज में पीएम-उषा और महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में 6 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर वर्ली एवं बस्तर कला पर प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षक नीलिमा सोनूले, छत्तीसगढ़ शिल्प बोर्ड रहीं कार्यशाला के पहले दिन आर्ट शीट्स पर बस्तर एवं बस्तर कला के स्ट्रोक्स सिखाया गया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। दूसरे दिन मिट्टी के पॉट्स पर कला कृतियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। छात्राओं ने अलग-अलग पार्ट्स को वर्ली तथा बस्तर कला के विभिन्न रंगों से सजाया। तीसरे दिन कॉलेज की बेरंग दीवारों को रंगीन कला कृतियों से सजाया गया है। जिसमे ढोलकल गणेश जी की आकृति, बस्तर की जन जातीय जीवन से जुड़ी आकृतियां बनाई गई। कार्यशाला के चौथे दिन कपड़े पर कला का प्रशिक्षण दिया गया है। कपड़े पर राधा-कृष्ण, बस्तर की जन जातीय लोग और वर्ली कला की सुंदर आकृतियां बनाई। पांचवे दिन विद्यार्थियों को बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट थीम पर असाइनमेंट्स दिए गए। छात्राओं ने डिब्बे, बोतल, रूमाल, पॉट्स यहां तक कि कचरे के डिब्बे को भी अपनी कला और रंगों से सजा दिया। कार्यशाला के पांच दिनों में छात्राओं का कुछ ऐसा लगाव हुआ कि कार्यशाला को प्राचार्या डॉ. सुचित्रा गुप्ता की अनुमति से एक दिन और बढ़ाया गया। छात्राओं की कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई कार्याशाला के अंतिम दिन छात्राओं द्वारा बनाई कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। वरिष्ठ प्राध्यापकों में डॉ. शंकर मुनि राय, डॉ. शैलेंद्र सिंह, डॉ. अनीता शंकर सहित मंजुला सोनी, शरद तिवारी एवं लिकेश्वर सिन्हा ने इसकी सराहना की तथा संयोजक एवं सदस्यों का हौसला बढ़ाया। समापन पर प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कॉलेज की दीवारों को कोरे काग़ज़ की संज्ञा दी जिसमे इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों ने रंगीन बना दिया। उन्होंने कहा कला हमारे नीरस जीवन में उसी रंग का काम करती है जो कोरे काग़ज़ को रंगों से सजा देती है। कार्यशाला में प्रशिक्षण से रोजगार की संभावना बढ़ी उन्होंने कहा बस्तर तथा वर्ली कला का यह प्रशिक्षण छात्राओं को रोज़गार के अवसर प्रदान करेगा। महिला प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. मीना प्रसाद ने बताया कम समय में एकजुट होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी ने अपनी सहभागिता दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी कार्यशाला होती रहेगी। आईक्यूएसी की संयोजक डॉ. अनीता साहा ने बताया कार्यशाला का विचार मन में आया, नीलिमा सोनूले से बात हुई और प्राचार्य की अनुमति से कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।


