दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मिला SGPC का प्रतिनिधिमंडल:पूर्व सीएम आतिशी के खिलाफ FIR की मांग, बोले- सिख गुरुओं पर टिप्पणी सहन नहीं

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के एक प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की है। इस मुलाकात में आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी के खिलाफ सिख गुरुओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज करने की मांग की गई है। एसजीपीसी का यह प्रतिनिधि मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा था। प्रतिनिधि मंडल में जूनियर उपाध्यक्ष बलदेव सिंह कल्याण, कार्यकारिणी सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर, हरियाणा सिख मिशन के प्रभारी सुखविंदर सिंह और दिल्ली सिख मिशन के प्रभारी मनवीत सिंह भी शामिल थे। आतिशी पर आपत्तिजनक शब्द प्रयोग करने का आरोप दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए आवेदन में एसजीपीसी ने कहा कि 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा के भीतर वरिष्ठ नेता आतिशी ने सिख गुरुओं के संदर्भ में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था। एसजीपीसी प्रतिनिध के अनुसार, इस टिप्पणी से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द दिल्ली विधानसभा की आधिकारिक कार्रवाई में दर्ज हैं। एसजीपीसी प्रतिनिधि मंडल ने अपने पत्र में यह भी कहा कि सिख गुरुओं की शिक्षाएं संपूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। सिख पंथ ने हमेशा गुरुओं की शिक्षाओं के अनुरूप जाति, धर्म, नस्ल और भेदभाव से ऊपर उठकर समानता, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया है। आतिशी ने धार्मिक भावनाओं काे आहत किया: कमेटी कमेटी ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी नेता द्वारा सिख गुरुओं के खिलाफ की गई टिप्पणी ने न केवल देश बल्कि विश्वभर में बसे सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। एसजीपीसी का मानना है कि यह बयान जानबूझकर दिया गया प्रतीत होता है, जो सिख समुदाय के प्रति उनकी मानसिकता को दर्शाता है। पत्र में यह भी कहा गया कि ऐसे समय में जब भारत और विश्व श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत शताब्दी को स्मरण कर रहे हैं, एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि द्वारा सिख गुरुओं के प्रति इस प्रकार की भाषा का प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रतिनिधि मंडल ने मांग की कि आतिशी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की जाए और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक नेता किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का साहस न करे।

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