दिल्ली ब्लास्ट-आतंकी उमर का एक और साथी श्रीनगर से गिरफ्तार:ड्रोन-रॉकेट बनाता था; कल दिल्ली से पकड़े गए आतंकी ने IED बनाने में मदद की थी

दिल्ली ब्लास्ट मामले में NIA ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से आतंकी उमर के एक और साथी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया। आरोप है कि जसीर आतंकी उमर को टेक्निकल सपोर्ट देता था। विस्फोट के लिए ड्रोन मॉडिफाई करता था और रॉकेट बनाने की भी कोशिश की थी। NIA के मुताबिक जसीर आतंकी उमर का प्रमुख सहयोगी है। वह अनंतनाग के काजीकुंड का रहने वाला है। दिल्ली ब्लास्ट में इसकी सक्रिय भूमिका रही है। डॉ. उमर के साथ मिलकर ब्लास्ट की प्लानिंग में शामिल था। वहीं दिल्ली से गिरफ्तार आमिर राशिद अली को लेकर खुलासा हुआ है कि ब्लास्ट से पहले उसने उमर को सेफ हाउस (सुरक्षित ठिकाने) उपलब्ध कराए, IED बनाने में भी मदद की थी। ये दलील सोमवार को NIA ने स्पेशल NIA कोर्ट में आमिर की कस्टडी पाने के लिए दीं। रविवार को दिल्ली से गिरफ्तार आमिर को आज कोर्ट में पेश किया गया था। पूरी सुनवाई बंद कमरे में हुई। यहां केवल मामले से जुड़े अधिकारी और वकील मौजूद रहे। NIA ने लंबी हिरासत की डिमांड की थी। दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल कार आमिर के ही नाम है। अब तक 8 लोग अरेस्ट, इनमें 5 डॉक्टर हैं
ब्लास्ट में शू बॉम्ब के इस्तेमाल का शक इस ब्लास्ट में सुरक्षा एजेंसियों को शू बम के इस्तेमाल का शक है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को विस्फोट वाली कार से एक जूता मिला है। इसकी जांच में अमोनियम नाइट्रेट और TATP के ट्रेस मिले, जिन्हें शुरुआती सुराग माना जा रहा है। TATP एक बेहद खतरनाक और सेंसिटिव विस्फोटक माना जाता है, जिसे आतंकी अक्सर इस्तेमाल करते हैं। यह मामूली झटके, रगड़ या थोड़ी सी गर्मी से भी फट सकता है। इसी वजह से इसे आतंकी दुनिया में ‘Mother of Satan’ यानी ‘शैतान की मां’ कहा जाता है। NIA ने रविवार को बताया कि कार चला रहा डॉ. उमर नबी एक आत्मघाती हमलावर (सुसाइड बॉम्बर) था। यह पहली बार है, जब किसी सुरक्षा एजेंसी ने ऑफिशियल तौर पर इसकी पुष्टि की है। इससे यह तय हो गया है कि ब्लास्ट सुसाइड अटैक ही था। 10 नवंबर को दिल्ली धमाके में 15 लोगों की मौत हुई है, 20 से ज्यादा लोग जख्मी हैं। क्या होता है शू बॉम्ब? शू बॉम्ब एक ऐसा विस्फोटक उपकरण होता है, जिसे जूते के अंदर छिपाकर बनाया जाता है। इसका उद्देश्य सुरक्षा जांच को धोखा देकर विस्फोटक को विमान, भीड़ वाली जगह या किसी संवेदनशील जगह तक ले जाना होता है। यह आमतौर पर जूते के सोल (तलवे) या अंदर की गद्दी में विस्फोटक सामग्री (जैसे PETN आदि) छिपाकर बनाया जाता है। इसमें कोई डेटोनेशन सिस्टम (ट्रिगर) लगाया जा सकता है, जिसे हमलावर अंदर बैठकर सक्रिय करने की कोशिश कर सकता है। उमर कब-कहां गया, रूट रीक्रिएट करने की तैयारी सूत्रों के मुताबिक अब सुरक्षा एजेंसियां उमर के पूरे मूवमेंट को रीक्रिएट करने की तैयारी में हैं। इसके लिए ब्लास्ट से पहले आतंकी का पूरा रूट मैप तैयार करेगी। इसमें वह ब्लास्ट से पहले कब और कहां-कहां गया था, इसे शामिल किया जाएगा। रूट मैप को 50 से ज्यादा CCTV कैमरों में कैद हुई i20 कार के फुटेज के आधार पर क्रिएट किया जाएगा। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि फरीदाबाद से दिल्ली पहुंचने तक, क्या कोई व्यक्ति उससे मिला, उसका पीछा किया या उसकी मदद की। सूत्र ने बताया कि उमर ने NCR में कितने घंटे बिताए, यह समझने के लिए सभी बिंदुओं को जोड़ना बेहद जरूरी है। धमाके वाली जगह के पास 9 एमएम की 3 गोलियां मिलीं वहीं धमाके वाली जगह के पास मलबे से पुलिस को 9 एमएम की 3 गोलियां मिली हैं, जिनमें से दो जिंदा कारतूस हैं। एक सूत्र ने रविवार को बताया कि मौके से कोई हथियार नहीं मिला। जली हुई कार के पास सिर्फ गोलियां कैसे पहुंचीं, इसकी जांच की जा रही है। यह गोलियां सिर्फ विशेष सुरक्षा यूनिट्स या परमिशन मिलने वाले लोग ही अपने पास रख सकते हैं। आम नागरिकों को इसे रखने की इजाजत नहीं है। सूत्र के अनुसार, मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से भी उनके हथियारों की जांच करने को कहा गया, लेकिन कोई भी कारतूस गायब नहीं मिला। मैप से समझिए धमाके की लोकेशन दिल्ली धमाके से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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