झालावाड़ में जनजाति सांस्कृतिक समागम गर्जना रैली की तैयारी को लेकर एक कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला रविवार को भगवान बिरसा मुंडा आश्रम असनावर में संपन्न हुई। दिल्ली में 24 मई को होने वाली इस रैली का मुख्य उद्देश्य धर्मांतरित अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को एसटी सूची से हटाने की मांग करना है। कार्यशाला के प्रथम सत्र में भगवान बिरसा मुंडा और कार्तिक उरांव के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। प्रदेश नगरी कार्य प्रमुख भवानीशंकर ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 341 में अनुसूचित जातियों के संबंध में स्पष्ट है कि धर्मांतरण पर व्यक्ति का नाम सूची से हट जाता है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों के लिए अनुच्छेद 342 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
भवानीशंकर ने कहा कि संविधान की इसी कमी के कारण अनुसूचित जनजाति समाज धर्मांतरण का सबसे आसान शिकार बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के बाद ऐसे लोग अवैध रूप से दोहरा लाभ उठाते रहते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अनुच्छेद 342 में संशोधन कर धर्मांतरित अनुसूचित जनजाति व्यक्तियों के नाम एसटी सूची से हटाना ही एकमात्र प्रभावी उपाय है, जिसे ‘डिलिस्टिंग’ कहा जा रहा है। जनजाति सुरक्षा मंच के जिला संयोजक रामकिशन भील ने बताया कि भारत में 705 जनसमूह अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल हैं। गुजरात सिंह भील, विभाग सह संगठन मंत्री, ने “दिल्ली चलो अभियान” को सफल बनाने पर जोर दिया। इसके तहत दीवार लेखन, पंजीयन ग्राम, ग्राम संपर्क और पंचायत समिति बैठकों की योजना बनाई गई है।


