बालाघाट में गरीब और जरूरतमंद लोगों को 5 रुपए में सस्ता और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही नगरपालिका की दीनदयाल रसोई योजना पिछले तीन दिनों से बंद है। बंद होने की वजह रसोई में चावल की कमी बताई जा रही है। सीएमओ का बयान: खाद्यान्न खपत की जांच के बाद हस्ताक्षर करेंगे रसोई में काम कर रहे नगरपालिका कर्मचारियों ने नाम न छापने और कैमरे में न आने की शर्त पर बताया कि चावल आबंटन की फाइल पर सीएमओ के हस्ताक्षर न होने की वजह से चावल का वितरण नहीं हो पाया है। सीएमओ बी.डी. कतरोलिया का कहना है कि खाद्यान्न खपत की अधिकता को लेकर जांच करने के बाद ही वे आबंटन पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि, दूरभाष पर चर्चा के दौरान उन्होंने जानकारी न होने की बात कही और जांच के बाद जवाब देने का आश्वासन दिया। बालाघाट विधायक और पार्षद के हस्तक्षेप से पहले भी शुरू हो चुकी है रसोई फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि चावल का आबंटन कब होगा और रसोई फिर से कब चालू होगी। रसोई के संचालन में लगे नगरपालिका कर्मी भी इस पर कुछ कहने से बच रहे हैं। शासन की इस महत्वपूर्ण योजना को जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह पहली बार नहीं है जब रसोई बंद हुई है। इससे पहले भी टेंडर प्रक्रिया के तहत रसोई का संचालन करने वाली संस्था ने चार महीनों तक रसोई बंद रखी थी। तब कांग्रेस पार्षद और बालाघाट विधायक के हस्तक्षेप के बाद रसोई शुरू हो पाई थी। हालांकि, वर्तमान में रसोई में गेहूं और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध है, लेकिन चावल की अनुपलब्धता के कारण रसोई को बंद रखा गया है। रसोई में भोजन करने आने वाले लोग खासतौर पर चावल की मांग करते हैं, जिसके चलते खाना नहीं बनाया जा रहा है।


