दीप जलाकर भक्तों ने मां चंद्रघंटा की आराधना की, मां कूष्मांडा की पूजा आज

सिटी रिपोर्टर | रांची चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां के भक्तों ने मंदिरों और घरों में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की। मंगलवार को कृष्णा नगर कॉलोनी के श्री राधाकृष्ण मंदिर में सुबह मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ हुआ। मंदिर के पुजारी ज्ञानदेव मिश्रा ने बताया कि नवरात्र में मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व है। मां का स्वरूप शांत और ममता से भरा है, जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन मां को पीले वस्त्र, पीले फूल और पीली मिठाई का भोग लगाया गया। मां चंद्रघंटा देवी पार्वती का शक्तिशाली रूप है, जिसे राक्षसों का संहार करने के लिए धारण किया गया था। देवी चंद्रघंटा के दस हाथों में कमल, माला, कमंडल, चक्र, गदा, धनुष, तलवार और त्रिशूल है। उनका वाहन सिंह है और माथे पर घंटे के समान चंद्रमा है, जिसके कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। रातू रोड वाली मइया दुर्गा मंदिर के पुजारी संतोष पाठक ने बताया कि सुबह पट खुलते ही भक्तों की पूजा के लिए लाइन लगने लगी और यह सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। बकरी बाजार भारतीय नवयुवक संघ के श्री दुर्गा मंदिर के पुजारी परमानंद तिवारी के अनुसार सुबह मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही भक्तों ने पहुंचना शुरु कर दिया। मेन रोड के काली मंदिर में भी देवी भक्तों की पूजा-अर्चना के लिए लंबी लाइन लग गई। पंडित राज कुमार मिश्रा ने बताया कि अधिकतर भक्त मां काली के स्वरूप की पूजा करते हैं। अपर बाजार के लक्ष्मी नारायण मंदिर में भी भक्तों ने मां दुर्गा के स्वरूप की पूजा-अर्चना कर मंगलकामना की।

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