दुर्ग जिले में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को रेलवे माल गोदाम में स्थायी नौकरी का झांसा देकर 33.50 लाख रुपए ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ‘ऑपरेशन विश्वास’ के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामला उतई थाना क्षेत्र का है। यह मामला तब सामने आया जब वेदांता नगर में रहने वाली रीति देशलहरा ने 18 नवंबर 2023 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि नवरात्रि पर्व 2022 के दौरान उनका पुराना परिचित बिशेश्वर मारकंडे उनके घर आया था। बिशेश्वर ने रीति देशलहरा के पति को बताया कि वह रसमड़ा रेलवे माल गोदाम में लीडर है। वहां स्थायी नौकरी दिलवा सकता है। उसने दावा किया कि वह तीन महीनों के भीतर नियुक्ति करा देगा। इसके लिए प्रति व्यक्ति 2 लाख 50 हजार रुपए देने होंगे। झांसे में आकर 32 युवकों से पैसे जुटाए उसके झांसे में आकर कुल 32 युवकों से पैसे जुटाए। 24 दिसंबर 2022 से 24 अप्रैल 2023 के बीच आरोपी कई बार रीति देशलहरा के घर उमरपोटी पहुंचे। उन्होंने युवाओं को नौकरी का आश्वासन दिया और अलग-अलग किस्तों में उनसे रुपए वसूले। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही पैसे लौटाए गए। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि बिशेश्वर पहले माल गोदाम में हमाली का काम करता था। इसी दौरान उसकी पहचान हेमंत साहू से हुई, जो खुद को “रेलवे माल गोदाम श्रमिक संगठन” का सचिव बताता था। प्रमोद मारकंडे भी इस ठगी के गिरोह का हिस्सा था। कमीशन का जाल और युवाओं को गुमराह करना एएसपी अभिषेक झा ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि हेमंत साहू बेरोजगार युवकों को नौकरी का लालच देता था। बिशेश्वर उम्मीदवार लाता था और रकम हेमंत को सौंप दी जाती थी। रेल माल गोदाम में पदस्थ कर्मचारी होना दिखाकर इन्हें “जुगाड़” करने का भरोसा दिलाया गया था। युवकों ने जब बार-बार नौकरी की स्थिति पूछी तो आरोपियों ने बहाने बनाकर उन्हें गुमराह किया। शिकायतकर्ता से भी कई महीनों तक पैसे लौटाने से इनकार किया गया। ठगे गए पैसों का इस्तेमाल आरोपियों ने गाड़ियां खरीदने, घर बनाने और निजी खर्चों में करना स्वीकार किया। पुलिस ने मामले में धारा 420, 120बी, 34 के तहत केस दर्ज कर उन्होंने कोर्ट में पेश किया गया। जहां से तीनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है और आगे की जांच की जा रही है।


