दमोह की कोतवाली पुलिस ने दूसरे की जमीन अपनी बताकर बेचने वाले गिरोह के पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अभी भी फरार हैं। सीएसपी अभिषेक तिवारी के मुताबिक, समन्ना गांव निवासी शोभाराम पटेल ने अपनी पैतृक जमीन 80 लाख रुपए में बेची थी। उसे सस्ती जमीन खरीदनी थी। इसकी जानकारी जब शोभाराम के चचेरे भाई गिरधारी पटेल को हुई तो उसने दमोह निवासी राजेश पटेल, हरगोविंद पटेल के साथ मिलकर साजिश रची। आरोपी राजेश पटेल ने कटनी जिले के वाकल में रहने वाली गेंदा बाई नाम की महिला को कमला बाई बनाकर असली कमला बाई सेन की कादीपुर स्थित जमीन की रजिस्ट्री शोभाराम के नाम करा दी। शोभाराम ने जब जमीन का नामांतरण करने के लिए आवेदन दिया तो तहसीलदार ने सागर में रहने वाली जमीन की असली मालिक कमला बाई को सत्यापन के लिए नोटिस भेजा। असली कमला बाई ने तहसीलदार के पास आकर कहा- मैंने जमीन किसी को नहीं बेची। इसके बाद नामांतरण नहीं हो पाया। फिर शोभाराम पटेल ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने करीब 8 माह पहले इस मामले में एफआईआर तो कर ली, लेकिन किसी आरोपी का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा था। कॉल डिटेल से खुला राज बाद में दमोह एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज को मामला सौंपा। टीआई आनंद राज ने खोजबीन की तो उन्हें एक नंबर मिला, जिससे शोभाराम पटेल से बात की गई थी, लेकिन वह नंबर बंद आ रहा था। बाद में जब उसकी कॉल डिटेल रिपोर्ट निकाली तो उसमें आरोपी राजेश पटेल के भतीजे से बातचीत के रिकॉर्ड मिले। पुलिस ने जब आरोपी के भतीजे को पकड़ा तो उसने बताया कि इस नंबर से मेरे चाचा राजेश पटेल ने बात की थी और इसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। आरोपियों ने शोभाराम को 31 लाख में जमीन बेची थी। रुपए आपस में बांट लिए थे। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी गिरधारी, राजेश पटेल, शोभाराम पटेल, फर्जी नाम से रजिस्ट्री करने वाली गेंदा बाई और राजेश पटेल की एक और करीबी महिला जानकी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में 2 आरोपी बैजनाथ पटेल और प्रकाश सेन फरार हैं।


