खिवनी अभयारण्य में बाघ और तेंदुए के मूवमेंट बढ़ने से उसके विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए देवास जिले का 1400 हेक्टेयर व सीहोर जिले के रातापानी सहित आसपास के 4500 हेक्टेयर जंगल वाले क्षेत्र को इसमें जोड़ा जाएगा। खिवनी अभयारण्य खंडवा के ओंकारेश्वर और भोपाल के रातापानी (सीहोर जिले की सीमा वाला क्षेत्र भी) अभयारण्य से जुड़ा है। यहां बाघ-तेंदुए का लगातार आना-जाना लगा रहता है। इस कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने यह तैयारी की है। विस्तार के बाद देवास जिले में फैले जंगल में 5900 हेक्टेयर (1400 व 4500 हेक्टेयर) जंगल और जुड़ जाने से इसका फैलाव 2.56 वर्ग किमी हो जाएगा। इसे लेकर डीएफओ अमित चौहान सहित अन्य अफसरों की भोपाल में बैठक हो चुकी है। खिवनी में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, चीतल, चौसिंगा, जंगली सुअर, सेही, भेड़की, चिंकारा, नीलगाय, बंदर, लंगूर, काला हिरण, खरगोश आदि वन्यप्राणी विचरण करते हैं। बाघ व तेंदुआ की सबसे ज्यादा मूवमेंट खिवनी में है। पिछले दिनों स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जबलपुर की टीम के सर्वे में इसका खुलासा हुआ था। हाल ही में एक खिवनी से तेंदुआ भोपाल जंगल बाघ के कॉरिडोर से पहुंचा था। जिले में बाघ की संख्या 7-8 और तेंदुआ की 130-160 है। वन परिक्षेत्र का विस्तार करने के साथ ही जहां-जहां भी गांव आ रहे हैं। उन गांवों में बाउंड्रीवॉल बनाने का भी प्लान है। क्षेत्र बढ़ने से वन्यप्राणियों का आना-जाना आबादी क्षेत्र में भी बढ़ेगा। इसके प्रस्ताव भी बनाकर भेजा जाना है। ट्रैप कैमरों से किया जा रहा सर्वे, 25 दिन में तेंदुओं की संख्या पता चलने की उम्मीद वन एसडीओ एसके शुक्ला ने बताया कि बाघ व तेंदुओं की बढ़ती संख्या को लेकर 2018 से 2022 तक स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जबलपुर की टीम ने सर्वे किया था। अब जंगल में फिर से सर्वे कार्य शुरू हो रहा है। इसके लिए वन्यप्राणियों के मूवमेंट वाले क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। संभवत: 25 दिन बाद बाघ व तेंदुओं की संख्या सामने आएगी। डीएफओ चौहान ने बताया कि वन्यप्राणियों की संख्या और मूवमेंट बढ़ने से खिवनी का विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए खातेगांव, पानीगांव, आष्टा, इच्छावर के जंगल क्षेत्र को लिया जाएगा।


