देश के 440 जिला में नाइट्रेट और यूरेनियम से युक्त भू-जल कमोबेश जिले की भी हालत अच्छी नही पसान नगर का भी पानी पीने योग्य नही

देश के 440 जिला में नाइट्रेट और यूरेनियम से युक्त भू-जल कमोबेश जिले की भी हालत अच्छी नही
पसान नगर का भी पानी पीने योग्य नही
अनूपपुर।
एक प्रतिशत सैंपल में आर्सेनिक की  मात्रा  मिली है। मई 2023 में भूजल की गुणवत्ता की जांच के लिए देश भर में कुल 15,259 निगरानी स्थानों को चुना गया था। इनमें से 25 प्रतिशत कुओं का विस्तार से एक अध्ययन किया गया। मानसून से पहले और बाद में 4982 स्थानों से भूजल का नमूना एकत्रित किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि इसमें से 20 प्रतिशत सैंपल नाइट्रेट की सांद्रता है। 45 मिलीग्राम प्रति लीटर (एमजी/एल) की सीमा को पार कर गई, जो कि विश्व स्वास्थ्य की संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा पेयजल के लिए निर्धारित सीमा है। राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु में 40 प्रतिशत से अधिक सैंपल में नाइट्रेट सीमा से ऊपर था, जबकि महाराष्ट्र के सैंपल, में 35.74 प्रतिशत, तेलंगाना में 28 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 24 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 23 प्रतिशत नाइट्रेट था। उत्तर प्रदेश, केरल, झारखंड और बिहार के भूजल में नाइट्रेट है. लेकिन इन प्रदेशों के मुकाबले कम है। अरूणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में सभी नमूने सुरक्षित सीमा के भीतर थे। सीजीडब्ल्यूवी ने कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में नाइट्रेट का स्तर 2015 से स्थिर बना हुआ है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 2017 से 2023 के बीच इसमें वृद्धि देखी गई है। पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा बच्चों में ब्लू बेबी सिड्रोम जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। साथ ही यह पानी पीने के लिए भी असुरक्षित है। भारत में 15 इस तरह के जिले चिन्हित किए गए जहां भूजल में नाइट्रेट का सबसे ज्यादा स्तर मिला है। इसमें राजस्थान में बाड़मेर, जोधपुर महाराष्ट्र में वर्धा, बुलडाणा, अमरावती, नांदेड, बीड जलगांव और यवतमाल, तेलंगाना में रंगारेड्डी, आदिलाबाद और सिद्दीपेट, तमिलनाडु में विल्लुपुरम् आंध्र प्रदेश में पलनाडु और पंजाब में बठिंडा शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भूजल में नाइट्रेट का सिचाई के चलते हो सकता है। जो संभवत उर्वरकों में मौजूद नाइट्रेट को मिट्टी में गहराई तक पहुंचा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में फ्लोराइड की अधिक मात्रा मिलाना चिंता का कारण है। गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मैदानी इलाकों वाले राज्यों में आर्सेनिक का स्तर अधिक पाया गया है। ये राज्य पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मणिपुर है। पंजाब के कुछ हिस्सों में और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के पानी में भी आर्सेनिक का स्तर अधिक पाया गया है। लंबे समय तक क्लोराइड और आर्सेनिक का उपयोग करने से गंभीर बीमारियां और विकृति पैदा हो सकती है। अनूपपुर के पसान में भी भूमिगत जल पीने योग्य नही है। कुछ वर्ष पहले पसान क्षेत्र के पानी का रासायनिक विश्लेषण किया गया था। इसमें पाया गया कि यहा पाया जाने वाला भूमिगत  जल पीने के योग्य नही है। पसान के वरिष्ठ नागरिक और कांग्रेस के संगठन मंत्री ने बताया कि पानी की विस्तृत रिपोर्ट उनके पास मौजूद है।

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