पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज से MBBS और PG के करीब 900 डॉक्टरों की बॉन्ड पोस्टिंग पिछले चार महीनों से अटकी हुई है। दैनिक भास्कर डिजिटल ने दो दिन पहले यानी बुधवार को बताया था कि इस बार परसेंट बेसिस पर डॉक्टरों को पोस्टिंग दी जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन काउंसलिंग होगी। भास्कर की इस खबर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुहर लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अब तक जो पोस्टिंग प्रक्रिया चल रही थी, उससे कई डॉक्टरों को परेशानी थी। इसलिए इस बार काउंसलिंग के बाद डॉक्टरों को पोस्टिंग दी जाएगी। सप्ताह भर में काउंसलिंग शुरू हो जाएगी। अब तक दी जा रही थी रैंडम पोस्टिंग अब तक विभाग रैंडमली डॉक्टर्स को पोस्टिंग देता था। लेकिन इस साल से पहले डॉक्टरों काउंसलिंग की जाएगी। इसके तहत डॉक्टर अपने प्रेफरेंस के आधार पर तीन जगह चुन सकते हैं। विभाग परसेंट के आधार पर डॉक्टरों की प्रेफरेंस को तवज्जो देगा। वहीं जो डॉक्टर बच जाएंगे, उन्हें फिर विभाग अपने हिसाब से अप्वाइंट करेगा। साइट अपडेट नहीं हाेने से देरी ये पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। विभाग की साइट अपडेट नहीं है, इसलिए देरी हो रही है। अपडेट के बाद ही डॉक्टर प्रेफरेंस फॉर्म भर पाएंगे। इसे लेकर सोमवार को जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षक आयुक्त को ज्ञापन भी सौंपा था। विभाग बोला: मांगी गई जानकारी नहीं मिलने से हो रही देरी साइट अपडेट नहीं होने की खबर भास्कर में पब्लिश होते ही डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ सर्विस की ओर से एक पत्र DME को जारी किया गया था। इसमें विभाग ने बताया गया कि कुछ कॉलेजों ने अपने एमबीबीएस स्टूडेंट के कुल अंक उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिसके चलते देरी हो रही है। वहीं DME से मेरिट के आधार पर स्टूडेंट्स की लिस्ट भेजने को भी कहा है। पीजी छात्रों पर अब तक कोई अपडेट नहीं DHS ने जो पत्र DME को जारी किया है, उसमें सिर्फ MBBS छात्रों को लेकर बात की गई है। इससे पीजी कर चुके 200 छात्रों में अब असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। ये लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि अब इन लोगों को लेकर विभाग क्या सोच रहा है और इनकी पोस्टिंग पर क्या निर्णय लिया जाएगा। पोस्टिंग लेट होने से गुड सर्विस नहीं मिल रही दरअसल, बॉन्ड पोस्टिंग के तहत बेहतर सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से इन जूनियर डॉक्टर्स को प्रदेश के अलग–अलग स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाता है। इनमें जिला अस्पताल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। पोस्टिंग लेट होने से इन संस्थानों में आने वाले मरीजों को मिल रही सर्विस में भी इम्पैक्ट पड़ रहा है। डॉक्टरों को अब तक 18 करोड़ का नुकसान वहीं जूडा एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ रेशम सिंह ने बताया कि मरीजों के साथ-साथ जूनियर डॉक्टर्स को भी नुकसान हो रहा है। पिछले चार महीने से ये डॉक्टर्स बॉन्ड अवधि के चलते प्राइवेट सेक्टर्स में काम नहीं कर पा रहे हैं। जबकि पोस्टिंग दे दी गई होती तो MBBS डॉक्टर की जेब में महीना 45 हजार आना शुरू हो जाता। वहीं PG डॉक्टर्स को सर्विस देने के एवज में 75 हजार की मंथली सैलरी मिल रही होती। इस पूरे मामले को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी है। इस लिहाज से देखा जाए तो इन डॉक्टर्स को अब तक 18 करोड़ 6 लाख का नुकसान हो चुका है। स्पेशलाइजेशन कोर्स करने में भी होगी देरी डॉ सिंह ने बताया, डॉक्टरों का आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। इसके अलावा स्पेशलाइजेशन कोर्स करने में भी लेट होगा। विभाग छह महीने पूरे होने से कुछ दिन पहले पोस्टिंग दे देगा। इसके बाद हमें दो साल सर्विस देनी होगी। ये सर्विस पूरी करने के बाद ही हम आगे दूसरा कोई कोर्स कर पर पाएंगे। लेट पोस्टिंग मिलने के चलते स्पेशलाइजेशन कोर्स करने में छह महीने का टाइम अनावश्यक जुड़ जाएगा। प्रदेश को भी इसके चलते लेट से स्पेशलाइज्ड डॉक्टर मिलेंगे। बॉन्ड पोस्टिंग जल्द देने के अलावा जूडा ने ये भी मांग की है कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर बॉन्ड पोस्टिंग की अवधि दो साल से घटाकर एक साल कर दी जाए।


