भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर गांव में अनहोनी या किसी भी दैवीय प्रकोप से बचने के लिए कोरिया जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर बैकुंठपुर-चिरमिरी सड़क के बीच स्थित ग्राम पंचायत अमरपुर में पांच दिन पहले ही होली पर्व ग्रामीणों ने मना लिया है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे वर्तमान पीढ़ी भी इस परंपरा हो निभा रहे है। बता दें कि अमरपुर ग्राम पंचायत के तहत झालपारा, बैलपारा, लावापारा समेत स्कूल पारा में होली मनाया जाता है। जबकि इस पंचायत के ढोढ़ीबहरा, सुरमी में होली 14 मार्च को मनाई जाएगी। पिछली कई पीढ़ियों से ऐसी परंपरा चली आ रही है। दरअसल, यहां होली के समय पर्व मनाने पर गांव में कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती थी, इसलिए दशकों पहले गांव के बुजुर्गों व बैगा ने गांव में बैठक कर यह निर्णय लिया था कि होली समेत सभी पर्व को पांच दिन पहले मनाया जाए। जिसके बाद से गांव में अनहोनी या दैवीय प्रकोप नहीं आया। इससे पहले यहां किसी प्रकार की बीमारी या हादसा होता था, ऐसा बुजुर्ग ग्रामीण बताते है। तभी से यह परंपरा चली आ रही है, जिसे गांव की हर पीढ़ी आगे बढ़ा रहा है। पंचांग के अनुसार होली 14 मार्च को मनाई जाएगी। लेकिन अमरपुर पंचायत मेंं 9 मार्च को पांच दिन पहले ही होली मनाई गई। यहां 8 मार्च की रात देवल्ला में होलिका दहन की गई और दूसरे रंग महोत्सव मनाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार जब से वे पांच दिन पहले होली मनाते आ रहे हैं, तब से उनके गांव में किसी भी प्रकार की अनहोनी नहीं हुई है। इस दौरान ग्रामीणों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली पर्व मनाया। इस ग्राम पंचायत के दो अन्य बस्तियों ढोढ़ीबहना व सुरमि में 14 मार्च को होली पर्व ग्रामीण मनाएंगे। ढोढ़ीबहरा व सुरमी अमरपुर पंचायत से करीब दो से तीन किमी दूर है। यहां इस परंपरा को ग्रामीण नहीं मानते है। जबकि अमरपुर मुख्य मार्ग पर ही झालपारा, बैलपारा, लावापारा समेत स्कूल पारा स्थित है। अंधविश्वास नहीं यह गांव की परंपरा है गांव के अवधराम सिंह, पंच सुरेश, राकेश यादव, शिवमंगल सिंह, मंगल सिंह, मोतीलाल, जयसिंह, शिवकुमार, जयराम, उदय सिंह, ईश्वर समेत पीके राजवाड़े समेत अन्य कई ग्रामीणों ने बताया कि हम परंपरा का निर्वहन करते हुए सालों से पांच दिन पहले ही होली पर्व मनाते आ रहे है। परंपरा का पालन करने को यहां के ग्रामीण अंधविश्वास नहीं मानते। यहां आदिवासी समेत राजवार, यादव एवं साहू समाज के लोग है।


