राजनगर| किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के उद्देश्य से सरकार ने विगत 15 दिसंबर को राज्यभर में अधिप्राप्ति केंद्र खोला। जहां पंजीकृत किसानों अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेच सकें। मगर अधिप्राप्ति केंद्र खुलते ही एक सप्ताह में गोदाम भर गए। इसके बाद से करीब दो माह बीत गया। धान अधिप्राप्ति केंद्र में ताला लटका हुआ है। किसान रोज पूछताछ कर रहे हैं कि कब अधिप्राप्ति केंद्र खुलेगा और वे अपना धान सरकारी केंद्र में जमा कर सकें। परन्तु अधिकारियों से कोई स्पष्ट जवाब किसानों को नहीं मिल रहा। इससे खास कर पंजीकृत किसान परेशान हैं। केंद्र खुलने के इंतजार में घर में रखा उनका धान को चूहा खाकर बर्बाद कर रहे हैं। कई पंजीकृत किसान भी सरकार की ढूलमूल रवैया के चलते बिचौलिया के हाथों भेजने को विवश हैँ। सरकारी की ढूलमूल नीति का फायदा बिचौलिया उठा रहे हैं। जानकारी के अनुसार बावजूद राइस मिल द्वारा धान का उठाव नहीं होने से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बड़ी संख्या में किसान धान बेचने के लिए तैयार बैठे हैं, सरकारी व्यवस्था के ठप होने के कारण किसान मजबूरीवश बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर धान बेचने को विवश हो रहे हैं। वहीं गोविंदपुर धान अधिप्राप्ति केंद्र में प्रतिनियुक्त ने बतया कि राजनगर प्रखंड के लैम्पसों में राइस मिलों को अब तक सीएमआर जारी नहीं होने के कारण धान का उठाव ठप है। उठाव नहीं होने से लैम्पसों में धान का स्टॉक भर गया है। जिसके चलते नए किसानों का धान खरीदा नहीं जा रहा है। कई किसान फोन कर जानकारी मांग रहे हैं कि गोदाम कब खाली होगा। राजनगर के गोविंदपुर, जुमाल, जामबानी एवं जोनबनी सभी लैंपसों की समान स्थिति है।


