दो साल में 22 करोड़ के 401 इनामी नक्सली ढेर:करोड़ों की इनामी राशि का क्या होगा?; जोखिम उठाने वाले जवानों और मददगारों को भी मिलेगा इनाम

बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं। ऑपरेशन के दौरान अनेक इनामी नक्सली मारे जा रहे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इनाम की राशि का क्या होगा? इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन ने व्यवस्था बनाई है। इसके अनुसार नक्सल ऑपरेशन में जितने जवानों ने योगदान दिया है, उन्हें इनाम की राशि बांटी जाएगी। दिसंबर 2023 से मई 2025 तक लगभग 22 करोड़ रुपए के 401 इनामी नक्सली मारे जा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ में लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशन के चलते 2024 में 14 करोड़ के 217 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद 2025 में अब तक 184 नक्सली मारे जा चुके हैं। इन पर लगभग आठ करोड़ रुपए का इनाम था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण नक्सली लीडर बासव राजू का मारा जाना है। राजू पर विभिन्न राज्यों में सवा तीन करोड़ रुपए का इनाम था। इसके अलावा लाखों रुपए के अनेक इनामी नक्सली भी ढेर किए गए हैं। इन नक्सलियों पर सरकारों ने इनाम घोषित कर रखा है और जवानों ने इन्हें ऑपरेशन में मारा है, इस कारण इनाम की पूरी राशि उन जवानों में बांटी जाएगी जो इस ऑपरेशन में शामिल थे। डायरेक्ट ऑपरेशन में भाग लेने वाले जवानों को अधिक राशि मिलती है और सपोर्ट सिस्टम में शामिल जवानों को अपेक्षाकृत कम राशि मिलती है। ऑपरेशन में जिला पुलिस के अलावा डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ, बीएसएफ के जवान होते हैं। अनुशंसा, स्क्रीनिंग, मजिस्ट्रियल जांच… फिर इनाम इनाम की राशि बांटने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। संबंधित जिलों के एसपी ऑपरेशन में शामिल जवानों को इनाम की राशि देने की अनुशंसा करते हैं और उसके बाद स्क्रीनिंग कमेटी उन नामों पर विचार करती है। लेकिन इतने में ही राशि नहीं मिल जाती। ऑपरेशन की मजिस्ट्रियल जांच की जाती है और इसके बाद ही जवानों को इनाम की राशि दी जाती है। मजिस्ट्रियल जांच इसलिए की जाती है ताकि ऑपरेशन के दौरान मारे गए नक्सलियों को लेकर किसी प्रकार का कोई विवाद न खड़ा हो। जांच में ऑपरेशन को क्लीन चिट मिलने के बाद जवानों के योगदान के अनुसार राशि दी जाती है। मुखबिर को भी दी जाती है राशि
आमतौर पर मुखबिर से सूचना मिलने पर फोर्स ऑपरेशन के लिए निकलती है। ऐसी सूचना देने वाले मुखबिर को भी इनाम की राशि में हिस्सेदार बनाया जाता है लेकिन उसका नाम गुप्त रखा जाता है। मुखबिर के द्वारा सूचना मिलने पर नक्सलियों को गिरफ्तार करने पर भी उनको इनाम देने का प्रावधान है। सरेंडर करने पर नक्सली के खाते में जमा होती है रकम कई नक्सली लगातार पुलिस के समक्ष सरेंडर कर रहे हैं। इनमें अनेक लाखों रुपए इनामी नक्सली हैं। जिन नक्सलियों पर इनाम घोषित है और वे सरेंडर करते हैं तो इनामी राशि उनके नाम से बैंक में जमा कर दी जाती है। इसे लॉकिंग पीरियड कहा जाता है। फिर तीन साल तक उस नक्सली का आचरण देखा जाता है। अगर उस नक्सली का व्यवहार सही रहा तो तीन साल बाद इनामी राशि उस नक्सली के पुनर्वास के लिए खर्च की जाती है।
प्रोत्साहन के लिए यह जरूरी है
ऑपरेशन में लगे जवान अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात मेहनत कर जोखिम लेते हैं। इस कारण उन्हें प्रोत्साहन के लिए यह राशि दी जाती है। इससे भी महत्वपूर्ण है कि आतंक से मुक्त होने पर उस क्षेत्र का विकास होता है और लोगों को सुविधाएं मिलती हैं। स्थानीय लोगों की भलाई के लिए जवानों की प्रतिबद्धता ही बस्तर को हिंसा मुक्त करने में मददगार होगी।
– सुंदरराज पी., बस्तर आईजी, नक्सल ऑपरेशन

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