द्वारकाधीश भगवान के सिर पर सजा सोने का मुकुट:गुलाब फूलों में हुए विराजमान, राल दर्शन में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

राजसमंद जिले के कांकरोली स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर में इन दिनों फागोत्सव और रसिया गान का उल्लास चरम पर है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से मंदिर में होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है, जो 3 मार्च पूर्णिमा तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर में रंग, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। गुलाब फूलों की मंडली में सजे प्रभु के मनोहारी दर्शन मंगलवार को दिन में प्रभु द्वारकाधीश के विशेष बगीचा श्रृंगार दर्शन हुए। निज तिवारी में आकर्षक बगीचा सजाया गया और राजभोग के दौरान प्रभु गुलाब फूलों की मनोहारी मंडली में विराजमान हुए। प्रभु के मस्तक पर स्वर्ण मुकुट सुशोभित था। गुलाबी बसंती वेशभूषा, पीतांबर, श्वेत ठाड़े वस्त्र, वनमाला और लाल खीन खाप का फरगुल धारण कराए गए। इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। रात्रि में विशेष राल दर्शन, अग्नि लपटों के बीच भक्तों ने किए दर्शन मंगलवार रात्रि को मंदिर में विशेष राल दर्शन आयोजित हुए। शयन दर्शन के समय गोवर्धन चौक में दो मशालों पर राल का विशेष मिश्रण डाला गया। इससे उठती अग्नि की ऊंची लपटों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन किए। यह दृश्य अत्यंत आकर्षक और आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर रहा। रसिया गान और रंगों की छटा फागोत्सव के अवसर पर गोस्वामी संजीव कुमार महाराज ने प्रभु को रंगों से खिलाया। रत्न चौक में राजभोग मनोरथियों, रसिया गान करने वालों और उपस्थित श्रद्धालुओं पर गुलाल और अबीर उड़ाई गई। पूरा परिसर रंगों और भक्ति गीतों से सराबोर हो उठा। रसिया गान की मधुर स्वर लहरियों के बीच भक्त झूमते नजर आए। मंदिर परिसर में फाल्गुनी उमंग और आस्था का अद्भुत वातावरण बना हुआ है। 3 मार्च तक चलेंगे होलाष्टक के आयोजन मंदिर में प्रारंभ हुआ होलाष्टक पर्व 3 मार्च पूर्णिमा तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन विशेष श्रृंगार, रसिया गान और विविध धार्मिक आयोजन होंगे। फागोत्सव के इस पावन अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु कांकरोली पहुंच रहे हैं।

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