धधकते अंगारों पर चले भक्त, बच्चे भी दौड़े:धुलेंडी पर महिदपुर-घोंसला-तराना में आस्था का ‘चूल’ आयोजन; बच्चों को लेकर भी चले नंगे पांव

धुलेंडी पर्व पर जहां पूरा देश रंगों में सराबोर है, वहीं उज्जैन के पास महिदपुर, घोंसला और तराना में मन्नत के नाम पर श्रद्धालु धधकते अंगारों पर चल रहे हैं। यही नहीं, वे अपने मासूम बच्चों की जान को भी खतरे में डालकर अंगारों से निकलते हुए नजर आए। इस दौरान कुछ छोटे बच्चे भी अंगारों पर दौड़ लगाते हुए दिखाई दिए। महिदपुर के धुर्रजटेश्वर महादेव मंदिर, घोंसला के मनकामनेश्वर महादेव मंदिर और तराना के महादेव मंदिर में धुलेंडी पर्व पर चूल का आयोजन किया गया। आस्था के नाम पर भक्त धधकते अंगारों पर चलकर निकले। दरअसल, मान्यता के अनुसार अपनी मन्नत पूरी होने पर बड़ी संख्या में भक्त धुलेंडी के दिन अंगारों पर चलते हैं। सालों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए यहां भव्य ‘चूल’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु जयकारों के साथ धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। सिर पर कलश और गोद में बच्चों को लेकर अंगारों पर उतरे भक्त घोंसला में मनकामनेश्वर महादेव मंदिर के सामने सालों पुरानी परंपरा के अनुसार इस बार भी लगभग 30 से 35 फीट लंबा और चार फीट चौड़ा गड्ढा तैयार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर उसमें लकड़ियां सजाई गईं और मंदिर के अखंड दीप से अग्नि प्रज्वलित की गई। कुछ ही देर में वह स्थान धधकते अंगारों में बदल गया। आग की लपटों के बीच ढोल-नगाड़ों की गूंज और “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ सबसे पहले मंदिर के पुजारी ने नंगे पांव अंगारों पर चलकर परंपरा का शुभारंभ किया। उनके पीछे-पीछे श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। कोई सिर पर कलश रखे था, कोई अपने बच्चे को गोद में लिए था, तो कोई वर्षों पुरानी मन्नत पूरी होने पर अंगारों पर कदम रख रहा था। ढोल-धमाकों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंगारों पर चले महिदपुर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कार्यक्रम की शुरुआत पूर्ण विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठान के साथ हुई। महंत राजेंद्र भारती ने माता हिंगलाज के नाम से विशेष पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही धधकते अंगारों की चूल को प्रज्वलित किया गया, श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता हिंगलाज और भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से ये अंगारे उनके लिए पुष्प के समान शीतल हो जाते हैं। चूल आयोजन से पूर्व गांव की पारंपरिक ‘गैर’ ने भगवान शिव की विशेष आराधना की। ढोल-धमाकों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरकते श्रद्धालुओं ने महादेव का आह्वान किया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग अंगारों पर चलते नजर आए।

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