धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम कोद स्थित प्राचीन मां चामुंडा माता मंदिर में आस्था, विश्वास और साहस का अद्भुत संगम देखने को मिला। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत यहां ‘चूल’ का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। बुधवार को सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। सबसे पहले चूल माता की विधिवत पूजा-अर्चना पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। हवन और धार्मिक अनुष्ठान के बाद चूल के लिए अंगारों को सजाया गया। जैसे ही अंगारे पूरी तरह धधक उठे, पूरा वातावरण “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। नंगे पैर अंगारों पर उतरे श्रद्धालु
इसके बाद मन्नतधारी श्रद्धालु एक-एक कर नंगे पैर धधकते अंगारों पर उतरे। महिला, पुरुष, युवक और युवतियां हाथों में नारियल और कलश लेकर चूल में चले और अपनी मन्नत पूरी की। कुछ श्रद्धालुओं ने अपने बच्चों को गोद में उठाकर अंगारों पर चलकर माता के प्रति अटूट आस्था प्रकट की। मन्नत पूरी होने पर दोबारा करते हैं चूल
मान्यता है कि सच्चे मन से चूल पर चलने से मां चामुंडा भक्तों के कष्ट दूर करती हैं, रोग-व्याधियों से रक्षा करती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। जिन श्रद्धालुओं की मुराद पूरी होती है, वे दोबारा मंदिर पहुंचकर अंगारों पर चलकर माता के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। ग्रामीण समिति ने संभाली व्यवस्थाएं
आयोजन के दौरान ग्रामीण समिति द्वारा सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं संभाली गईं। हर वर्ष की तरह इस बार भी किसी श्रद्धालु के घायल या झुलसने की कोई सूचना सामने नहीं आई। होली के बीच आस्था की अग्नि परीक्षा
होली के रंगों के बीच कोद गांव में आस्था की इस अग्नि परीक्षा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।


