धमतरी के स्कूलों में बसंत पंचमी पर विद्या आरंभ संस्कार:सरस्वती पूजन के साथ हनुमान चालीसा और मंत्रों का सस्वर पाठ

छत्तीसगढ़ के धमतरी में बसंत पंचमी के अवसर पर विद्यालयों में सरस्वती पूजन और विद्या आरंभ संस्कार का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने हनुमान चालीसा के साथ अलग-अलग मंत्रों का सस्वर पाठ भी किया। विद्या आरंभ संस्कार से पहले पूजा-अर्चना में पालक यजमान के रूप में उपस्थित थे। जो बच्चे विद्यार्थी जीवन शुरू करने जा रहे थे, उनका विद्यारंभ संस्कार स्लेट, पेंसिल और कलम की पूजा कर संपन्न कराया गया। बच्चों ने स्लेट पर ‘ॐ भूर्भुवः स्वः’ शब्द लिखकर अपनी शिक्षा की शुरुआत की। बच्चों ने मां सरस्वती की पूजा कर लिया विद्या का आशीर्वाद सभी बच्चों ने कतारबद्ध होकर बारी-बारी से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की और विद्या तथा विवेक की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर विद्यालय संचालकों ने बताया कि बसंत पंचमी मां सरस्वती का अवतरण दिवस है और यह हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन छोटे बच्चों का विद्या संस्कार कराया जाता है, जो हिंदू परंपरा में बच्चे की शिक्षा आरंभ का आधार है। बसंत पंचमी पर हुआ विद्या आरंभ संस्कार, शिक्षा की परंपरा उन्होंने कहा कि 3 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद स्कूल जाने वाले बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार कराया जाता है। यह 16 संस्कारों में से नौवां स्थान रखता है और ज्ञान प्राप्ति की नींव रखता है। गायत्री परिवार के सदस्यों ने बसंत पंचमी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दिन ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य का प्रतीक है। मां सरस्वती के प्राकट्य का धार्मिक महत्व बताया सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल छिड़ककर मां सरस्वती को प्रकट किया था, जिन्होंने वीणा वादन से ब्रह्मांड में चेतना और वाणी का संचार किया। इस दिन उनकी पूजा से बुद्धि, ज्ञान और रचनात्मकता में वृद्धि होती है, जिसे विशेष रूप से बच्चों के लिए शुभ माना जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *