छत्तीसगढ़ के धमतरी में पुलिस कस्टडी में हुई ठगी के आरोपी की मौत के मामले की जांच के लिए कांग्रेस की टीम थाने पहुंची। टीम ने थाना प्रभारी से घटना की पूरी जानकारी ली। कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस गोलमोल जवाब दे रही है और पहले से ही एक स्क्रिप्ट तैयार कर रखी है। जांच कमेटी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने में लगी हुई है, और राजनांदगांव में भाजपा के बड़े कार्यकर्ता परिजनों पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी और कड़ी कार्रवाई की मांग करेगी। कांग्रेस की जांच टीम ने मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। मृतक पर 7 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप था। धोखाधड़ी के आरोपी की पुलिस कस्टडी में मौत धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र में हाल ही में किसानों के साथ धोखाधड़ी के आरोपी की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने जिला अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया और पुलिस पर आरोपी को पीट-पीटकर मारने का आरोप लगाया। परिजनों ने कई घंटों तक प्रदर्शन किया। बाद में अर्जुनी थाना प्रभारी को निलंबित किया गया, जिसके बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम के लिए सहमति दी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस मामले में पुलिस ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है, जो अभी जारी है। इधर, पुलिस कस्टडी में मौत के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक जांच कमेटी का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता कुंवर सिंह निषाद विधायक गुंडरदेही कर रहे हैं। इस कमेटी में सदस्य के रूप में संगीता सिन्हा विधायक बालोद, अंबिका मरकाम विधायक सिहावा, ओंकार साहू विधायक धमतरी, और शरद लोहान जिला अध्यक्ष धमतरी शामिल हैं। जांच टीम ने राजनांदगांव में मृतक के परिजनों से पूछताछ के बाद धमतरी के अर्जुनी थाना पहुंचकर कस्टडी में हुई घटना की जांच की। जांच टीम का आरोप- पुलिस और परिजनों के बयानों में अंतर कांग्रेस की जांच कमेटी के संयोजक कुंवर सिंह निषाद ने बताया कि यह पुलिस कस्टडी में हुई एक गंभीर वारदात थी। जिला राजनांदगांव के ग्राम भंवरमरा निवासी मृतक दुर्गेश कठोलिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस और परिजनों के बयानों में काफी विरोधाभास है। परिजनों के मुताबिक, 29 तारीख को दुर्गेश को डी मार्ट से उठाकर पीटा गया और उनके वाहन को भी थाने लाया गया, जबकि पुलिस के अनुसार दुर्गेश को 30 तारीख को उनके गांव से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना था कि आरोपी शाम 7:30 बजे गांव में टहल रहा था, जबकि मौके पर कई किसान भी मौजूद थे। इधर, घर वालों ने दावा किया कि दुर्गेश को घर ले जाकर मारपीट की और उसके दस्तावेज भी ले लिए, लेकिन बाद में जांच में यह पाया गया कि दस्तावेज नहीं लाए गए थे। हालांकि, पुलिस ने किसी भी दस्तावेज को साथ नहीं लाने की बात कही। कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि पुलिस ने आरोपी की एमएलसी करवाई, जिसमें वह स्वस्थ था। इसके बाद पुलिस के बयान में विरोधाभास दिखा, जिससे ऐसा लग रहा है कि पुलिस अपने स्टाफ को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक भी मारपीट में शामिल थे। कांग्रेस का आरोप- पुलिस कस्टडी में हुई मारपीट से आरोपी की मौत कुंवर सिंह निषाद ने यह भी कहा कि पुलिस कस्टडी में हुई मारपीट के कारण दुर्गेश की मौत हुई, जबकि पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के यह दावा किया कि आरोपी की मौत हार्ट अटैक से हुई है। पुलिस ने उसी दिन कुछ दस्तावेज पर परिजनों के हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने मना कर दिया। जब परिजनों ने कड़ी पूछताछ की, तो पुलिस ने बताया कि दुर्गेश की मौत हो चुकी है।


