नवग्रह पीठ के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा का आगाज हुआ। शास्त्री जी तय समय से तीन घंटे की देरी से कथा स्थल पहुंचे, लेकिन उनके इंतजार में सुबह से ही महिलाओं और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पंडाल में जमी रही। देरी से पहुंचने पर शास्त्री जी ने भक्तों को भरोसा दिलाया कि वे उन्हें निराश नहीं करेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि वे 20 फरवरी की सुबह भी मौजूद रहेंगे और श्रद्धालुओं को कथा सुनाएंगे। हनुमंत भक्ति का सार अपने प्रवचन में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमान जी की भक्ति में ही जीवन का असली सार है। उन्होंने कुछ प्रमुख बातें कहीं। अगर भगवान राम को खुश करना है, तो हनुमान जी के चरण पकड़ लें, प्रभु अपने आप प्रसन्न हो जाएंगे। उन्होंने समझाया कि सिर्फ लक्ष्मी जी की पूजा काफी नहीं है, उनके साथ नारायण की पूजा भी जरूरी है। बिना नारायण के लक्ष्मी चली जाती हैं, लेकिन जहां नारायण होते हैं, वहां लक्ष्मी खुद खिंची चली आती हैं। जैसे पलकें आंखों की रक्षा करती हैं, वैसे ही भगवान अपने भक्त का ध्यान रखते हैं। भक्ति करने वाले को दुख परेशान नहीं करता। जीवन दर्शन और चरित्र शास्त्री जी ने कामयाबी और खुशहाली पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि कामयाब आदमी खुश हो, लेकिन जो खुश रहेगा वह एक दिन कामयाब जरूर होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंसान को अपना चेहरा नहीं बल्कि चरित्र चमकाना चाहिए, क्योंकि अच्छे चरित्र वाले की पुकार ईश्वर जरूर सुनता है। मंच पर जैसे ही बागेश्वर धाम सरकार पहुंचे, पूरा पंडाल जय श्री राम के नारों से गूंज उठा। वहां मौजूद दाती महाराज ने उनका स्वागत किया।


