धौलपुर जिले के चंबल अंचल में स्थित राजघाट गांव को लेकर चल रहे “सेव राजघाट अभियान” को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण संवैधानिक समर्थन मिला है। गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में माना है। NHRC की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शिकायत में वर्णित तथ्य प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन को दर्शाते हैं। आयोग ने मामले का अवलोकन करने के बाद जिला मजिस्ट्रेट, धौलपुर को जांच कर 2 सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी चंबल नदी के किनारे बसे राजघाट गांव में स्वास्थ्य केंद्र, स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़क, स्वच्छता और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। मानसून के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब गांव का संपर्क लगभग कट जाता है और स्कूल व अस्पताल तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। आपात स्थितियों में ग्रामीणों को खतरनाक चंबल नदी पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे जान का सीधा जोखिम उत्पन्न होता है। कुछ मामलों में नदी से शव निकालने, बच्चों द्वारा मगरमच्छ-प्रभावित पानी में उतरने और चिकित्सा सहायता के अभाव में गंभीर घटनाएं सामने आने का भी उल्लेख किया गया है। इन परिस्थितियों का सबसे अधिक असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। NHRC ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग का यह हस्तक्षेप ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी अधिकारों की अनदेखी पर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
“सेव राजघाट अभियान” से जुड़े लोगों का कहना है कि NHRC का यह संज्ञान न केवल राजघाट गांव, बल्कि देश के उन तमाम उपेक्षित ग्रामीण इलाकों के लिए उम्मीद की किरण है, जहां अब भी नागरिकों को उनके मौलिक मानवाधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।


