रायपुर का पहला कृष्ण कुंज गार्डन अब उजाड़ हो गया है। यहां लोग न जाएं, इसलिए इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया गया है। गार्डन में लगाए पेड़ सूख चुके हैं। चारों ओर कचरा फैला है। गार्डन की सफाई महीनों से नहीं की गई है। तेलीबांधा थाने के ठीक सामने बने इस गार्डन में अवंति विहार, वीआईपी रोड, शंकरनगर, तेलीबांधा समेत आसपास के कई इलाकों के लोग आते थे। लेकिन बिना मेंटेनेंस के गार्डन बदहाल हो गया है। पिछली कांग्रेस सरकार ने रायपुर समेत राज्यभर में 169 जगहों पर नए कृष्ण कुंज गार्डन बनाने का फैसला लिया था। रायपुर में इस गार्डन की शुरुआत 19 अगस्त 2022 को की गई थी। गार्डन बनने के समय यहां बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना था। 1.68 हेक्टेयर में बने इस गार्डन में बरगद, पीपल, कदंब, आम, इमली, जामुन, बेर और नीम समेत कई प्रजातियों के 383 पौधे लगाए गए थे। देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे सूख गए हैं। उद्देश्य- हरियाली बढ़ाना-प्रदूषण रोकना था
कृष्ण कुंज का निर्माण करने का मुख्य उद्देश्य वृक्षों का संरक्षण और नगरीय क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना था। इसके साथ ही गार्डन में कृष्ण जन्मस्थली कारागार की प्रतिकृति और भगवान कृष्ण से जुड़े भित्ति चित्र भी बनाए गए थे। अब ये भी खराब हो चुके हैं। 169 नगरीय निकायों में लगभग 224 एकड़ रकबे में 55,781 पौधों का रोपण किया गया था। खर्च-एक गार्डन बनाने में 15 से 20 लाख
जानकारी के अनुसार एक कृष्ण कुंज को बनाने में 15 से 20 लाख रुपए तक खर्च किए गए थे। दावा किया गया था कि इससे शहरों में प्रदूषण कम होगा, बच्चों को खेल-कूद के लिए जगह मिलेगी और औषधीय महत्व के पौधों से लोगों को घरेलू इलाज के लिए औषधियां मिल सकेंगी।


