प्रदेश में हर साल करीब 4 लाख सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की कुंडली लिखी जाती है। इसे सरकारी भाषा में गोपनीय प्रतिवेदन या सी.आर. (गोपनीय रिपोर्ट) कहा जाता है। अब इसमें बड़ा बदलाव करते हुए सी.आर. लिखने की प्रक्रिया को बदला जा रहा है। सी.आर. में कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाली ‘क-प्लस’, ‘क’, ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ श्रेणियों की जगह अब 0 से 10 अंकों तक की रेटिंग दी जाएगी। अभी तक यह व्यवस्था केवल अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू थी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे पहले मंत्रालय और विभागाध्यक्ष मुख्यालय में लागू किया जा रहा है। इसके बाद इसे सभी विभागों और मैदानी कार्यालयों में लागू किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) का दावा है कि नए सिस्टम से अधिकारी-कर्मचारियों के वरिष्ठ अधिकारी उनकी सी.आर. ऑनलाइन भरने से मना नहीं कर सकेंगे। यदि वरिष्ठ अधिकारी ने समय पर सी.आर. को अंक देकर अग्रेषित नहीं किया, तो यह रिपोर्ट स्वतः ही उच्चाधिकारी के पास चली जाएगी। इसके बाद उच्चाधिकारी अपने विवेकानुसार सी.आर. का अध्ययन कर रेटिंग दे सकेंगे। हालांकि ऑनलाइन सी.आर. और अंकों के आधार पर रेटिंग देने के बावजूद पूर्ववत भर्ती नियमों का पालन किया जाएगा। ऑनलाइन भी भर सकेंगे सी.आर. नए सिस्टम के अनुसार अब कर्मचारी स्वयं भी सी.आर. ऑनलाइन भर सकेंगे। उनके कार्यालय प्रमुख भी ऑनलाइन अपने टिप्पणी दर्ज कर सकेंगे। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि इस नई व्यवस्था से सी.आर. लिखने में होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। समय पर सी.आर. नहीं लिखे जाने और कार्यालय प्रमुख द्वारा इसे पूरा न किए जाने के कारण हर साल सैकड़ों कर्मचारियों की पदोन्नति, वेतन, पेंशन और अन्य हितों पर असर पड़ता है। 15 मई तक भरी जा सकेगी सी.आर. सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को ‘स्पैरो’ (SPARROW) सिस्टम अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह सिस्टम अब तक केंद्र सरकार के डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) द्वारा केवल अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। इस संबंध में अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन सी.आर. भरने की अंतिम तिथि पहले 30 अप्रैल थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 मई कर दिया गया है, क्योंकि अब तक केवल 25 प्रतिशत अधिकारियों ने ही सी.आर. भरी है।


