सरिस्का बाघ परियोजना से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 248-ए को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के एनसीआर डिविजन ने इस हाइवे पर सरिस्का से निकलने वाले 22 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड के पिछले सभी प्रस्ताव वापस ले लिए हैं। अब भारतीय वन्यजीव संस्थान के सुझावों के आधार पर नया एकीकृत प्रस्ताव बनाया जाएगा। इसकी मंजूरी राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थाई समिति की बैठक में मिल गई है। नए प्रस्ताव में सड़क के बदले गैर वन भूमि देने की बाध्यता नहीं रहेगी। इसके स्थान पर नष्ट हो चुके वन क्षेत्र की जमीन को विकसित किया जा सकेगा। अब पीडब्लूडी को सड़क के बदले कहीं और गैर-वन भूमि देनी पड़ती थी। ये उपलब्ध नहीं हो पाती थी। नई प्रक्रिया में वन भूमि के बदले दोगुनी वन भूमि विकसित कर पौधरोपण कराना होगा। “वन विभाग के नए सुझावों के साथ नया प्रस्ताव बनाकर पोर्टल पर आवेदन किया जाएगा। पूर्व में गैर-वन भूमि के आधार पर आवेदन था। अब क्षतिग्रस्त वन भूमि के आधार पर आगे बढ़ेंगे।” – वेदप्रकाश शर्मा, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, एनएच उच्चाधिकारियों के भ्रमण के बाद बदली रणनीति पीडब्ल्यूडी एनएच ने पूर्व में वन्यजीव अनुमति के लिए परिवेश पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत किए थे। किंतु इन प्रस्तावों में तकनीकी स्पष्टता का अभाव था। 11 दिसंबर को सरिस्का के उच्चाधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण और आंतरिक समीक्षा के बाद यह अनुभव किया गया कि टुकड़ों में आवेदन करने से परियोजना की अनुमति में विलंब हो सकता है। पूर्व के प्रस्तावों के साथ न तो अंतिम विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार था और न ही कोई ठोस प्रशासनिक आधार। इसीलिए विभाग ने अब यह निर्धारित किया है कि केवल एक अंतिम और पूर्ण प्रस्ताव के साथ ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। सरिस्का के मुंडावारा मोड़ से नटनी का बारां तक का 22 किमी लंबा हिस्सा संवेदनशील है। इसे 2/4 लेन एलिवेटेड रोड बनाने के लिए 18.48 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता है।


